भाजपा में रेखा वर्मा का कद बरकरार
राजेश अग्रवाल की राष्ट्रीय जिम्मेदारी खत्म
बरेली। भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में बरेली के वरिष्ठ नेता राजेश अग्रवाल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। वहीं, लखीमपुर खीरी की धौरहरा सीट से पूर्व सांसद रेखा वर्मा को लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों फैसलों को पार्टी की आगामी राजनीतिक रणनीति और सामाजिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजेश अग्रवाल छह बार विधायक और उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री रह चुके हैं। भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में उन्हें राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी नहीं मिली। यह पद फिलहाल केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को अतिरिक्त जिम्मेदारी के तौर पर दिया गया है। राजेश अग्रवाल को आगे पार्टी में कौन सी नई जिम्मेदारी मिलेगी, इसे लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
उम्र के चलते जिम्मेदारी में बदलाव की चर्चा
राजेश अग्रवाल कुछ ही दिनों में 83 वर्ष के होने वाले हैं। ऐसे में उनकी उम्र को राष्ट्रीय स्तर की अहम जिम्मेदारी से हटाए जाने की प्रमुख वजह माना जा रहा है। उनके बेटे मनीष अग्रवाल ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने उनके पिता को लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी हैं और नेतृत्व का निर्णय सर्वोपरि है।
इधर, बरेली भाजपा में यह चर्चा भी तेज है कि कैंट विधायक संजीव अग्रवाल को प्रदेश कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिल सकती है। वह वर्तमान में प्रदेश भाजपा में सहकोषाध्यक्ष हैं और प्रदेश कोषाध्यक्ष का पद खाली है।
रेखा वर्मा को बरकरार रखने के सियासी मायने
रेखा वर्मा को दूसरी बार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने को भाजपा की पिछड़ा वर्ग पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। रेखा वर्मा कुर्मी समाज से आती हैं, जो भाजपा के परंपरागत पिछड़ा वर्ग समर्थक आधार में महत्वपूर्ण माना जाता है।
राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से यह फैसला सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण की काट के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। भाजपा अलग-अलग पिछड़ी जातियों को संगठन में प्रतिनिधित्व देकर सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।
ब्रज क्षेत्र में लोध समाज से जुड़े पूरनलाल लोधी को महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी दिए जाने के बाद रेखा वर्मा को राष्ट्रीय स्तर पर दोबारा उपाध्यक्ष बनाए जाने से भाजपा के सामाजिक संतुलन की रणनीति के संकेत मिलते हैं।
बरेली में नई जिम्मेदारियों पर निगाह
राजेश अग्रवाल की राष्ट्रीय जिम्मेदारी खत्म होने के बाद अब बरेली के राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले कदम को लेकर है। वहीं, कैंट विधायक संजीव अग्रवाल को प्रदेश संगठन में और बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावनाओं पर भी नजर है। ऐसे में भाजपा के संगठनात्मक फेरबदल का असर बरेली की स्थानीय राजनीति पर भी पड़ने की संभावना है।




