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पत्नी की क्रूरता के मद्देनजर कोर्ट सुनाया

 पति के हक में फैसला, तलाक मंजूर

गाजियाबाद। अतिरिक्त परिवार न्यायालय ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में पति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए तलाक की याचिका मंजूर कर ली। अदालत ने माना कि पत्नी का व्यवहार पति के प्रति क्रूरता की श्रेणी में आता है और पति द्वारा लगाए गए आरोप साक्ष्यों से प्रमाणित हुए हैं। कोर्ट ने पति को तलाक की डिक्री प्रदान कर दी है। पति की ओर से पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता उमेश भारद्वाज ने बताया- याचिका में पत्नी पर लगातार मानसिक प्रताड़ना, अमर्यादित व्यवहार और वैवाहिक संबंधों को असहनीय बना देने के आरोप लगाए गए थे। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में दस्तावेजी साक्ष्य, गवाहों के बयान और विभिन्न न्यायिक नजीरों का हवाला दिया गया। इन सभी के परीक्षण के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि पति के साथ क्रूरता हुई है। लगातार बदलता गया। पति ने अदालत को बताया कि पत्नी उसके साथ गलत व्यवहार करती थी और प्रताड़ित करती थी, जिससे वैवाहिक जीवन प्रभावित हो गया। पति ने यह भी कहा कि रिश्ते सुधारने के कई प्रयास किए गए, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। हालात इतने बिगड़ गए कि वर्ष 2018 से दोनों अलग-अलग रहने लगे। इसके बाद पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा-13 के तहत ‘क्रूरता’ के आधार पर विवाह विच्छेद की याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। न्यायालय ने माना कि पति द्वारा लगाए गए आरोप केवल आरोप भर नहीं हैं, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों से उनकी पुष्टि होती है। इसी आधार पर अदालत ने तलाक की याचिका स्वीकार करते हुए पति के पक्ष में फैसला सुनाया। न्यायालय का यह फैसला ऐसे मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाएगा, जहां लंबे समय तक वैवाहिक संबंध पूरी तरह टूट चुके हों और क्रूरता के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हों।

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