वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट भी हो रहा बेअसर
लोहिया नगर के भूजल में लगातार मिल रहा धीमा जहर
गाजियाबाद। ‘एक तरफ जल ही जीवन है’ जैसे स्लोगन शासन प्रशासन की ओर से प्रचारित-प्रसारित कर लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाता है, लेकिन प्रशासनिक अनदेखी के चलते ऐसे कई उदाहरण देख जा रहे हैं जहां जल ही लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल रहा है। यहां हम लाल क्वार्टर लोहिया नगर में रहने वाले लोगों के बारे में बात कर रहे हैं, क्योंकि एक लंबे अरसे से यहां के निवासी दूषित जल की समस्या से जूझ रहे हैं। उनके सामने महज दो ही विकल्प हैं, या तो वे दूषित जल पर निर्भर रहकर अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करें, या फिर बाजार से पानी खरीद कर पियें। आरोप है कि मेरठ रोड औद्योगिक क्षेत्र में स्थित श्रीराम पिस्टन के एक प्लॉट में केमिकल गतिविधियों के चलते लोहिया नगर सी ब्लॉक का भूजल दूषित हो चला है। लोगों का आरोप है कि इस ब्लॉक के नीचे भूगर्भ जल में हेक्सावेलेंट क्रोमियम नामक पदार्थ मिल रहा है। इस केमिकल के भूगर्भ में मिलने के चलते स्थानीय लोगों को मिलने वाले पेयजल का टीडीएस अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि यह समस्या एक लंबे समय से उनके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल रही है। इससे बचने के लिए नगर निगम ने यहां वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाया था, लेकिन नगर निगम की इस कवायद का कोई खास फर्क पड़ता नहीं दिख रहा है। उन्होंने बताया कि कई साल पहले से यह समस्या चली आ रही है, लेकिन प्रशासन द्वारा अभी तक एक समस्या का कोई प्रभावी समाधान नहीं कराया गया है। आस-पास के घरों में दूषित पानी आने से स्थानीय निवासी परेशान है, लेकिन प्रशासन इस ध्यान देने को राजी नहीं है।
वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट का नहीं कोई फायदा
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब इस समस्या का पुरजोर विरोध किया गया तब नगर निगम ने यहां वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया था। इसके बावजूद जहां दूषित जल की समस्या का समाधान नहीं हुआ है। लोहिया नगर लाल क्वार्टर के निवासी लगातार ऐसे जल पर निर्भर है जिसमें खरतनाक केमिकल पदार्थ मिले हुए हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस समस्या से वे पूरी तरह निजात चाहते हैं। इसके लिए प्रशासन को सख्त और कड़े कदम उठाने होंगे जिससे कोई भी औद्योगिक इकाई खतरनाक केमिकल भूजल में ना मिला सके।




