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आफतः रावली व मुदफ्फरा में घुसा पानी मालन नदी का पानी, जनजीवन प्रभावित

मालन नदी का पानी गांवों में आने से आवाजाही प्रभावित, ग्रामीणों को परेशानी

-जान जोखिम में डालकर नाव व ट्रैक्टरों से आवागमन कर रहे ग्रामीण
-मालन का पानी खेतों में घुसने से फसल बर्बाद होने और जमीन कटान का खतरा
-सड़क पर पानी आने से जिला मुख्यालय से कई गांवों का संपर्क सीधा टूटा
-छात्र-छात्राओं का स्कूल-कॉलेज जाना हुआ मुश्किल
-हर साल बर्बादी झेल रहे किसानों ने स्थायी समाधान की मांग उठाई

बिजनौर, संवाददाता।
मालन नदी एक बार फिर उफान पर है। नदी का पानी आसपास के गांवों और संपर्क मार्गों पर पहुंचने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रावली और मुजफ्फापुर केशो उर्फ मुदफ्फरा गांव में मालन नदी का पानी घुसने से जनजीवन प्रभावित हो गया है। कई स्थानों पर सड़क पर पानी भर जाने के कारण जिला मुख्यालय से गांवों का सीधा संपर्क प्रभावित हुआ है। ग्रामीणों को जरूरी काम से आने-जाने के लिए नाव और ट्रैक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है। पानी के तेज बहाव के बीच यह आवागमन लोगों के लिए जोखिम भरा बना हुआ है।
मालन नदी में जलस्तर बढ़ने के साथ ही मालन नदी का पानी गुरूवार की सुबह खेतों से होता हुआ गांवों तक पहुंच गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, नदी का पानी संपर्क मार्गों पर आने के बाद आवागमन बेहद कठिन हो गया है। कई जगह पानी इतना अधिक है कि पैदल निकलना संभव नहीं है। ग्रामीण मजबूरी में नाव और ट्रैक्टरों के जरिए सड़क और जलभराव वाले हिस्सों को पार कर रहे हैं। इस दौरान बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
खेतों में पानी भरने से किसानों को फसल बर्बाद होने की चिंता सताने लगी है। लगातार पानी के बहाव के कारण खेतों की जमीन कटने का खतरा भी बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि हर वर्ष बरसात के दौरान मालन नदी का पानी उनकी फसलों और जमीन को नुकसान पहुंचाता है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान आज तक नहीं हो सका है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्रभावित मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था कराने, जलनिकासी की व्यवस्था करने और जरूरत पड़ने पर नाव उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही किसानों ने मालन नदी के कटान और बाढ़ की समस्या से स्थायी निजात दिलाने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग उठाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ और कटान के दौरान राहत कार्य करने के बजाय नदी के पानी को गांवों और खेतों में पहुंचने से रोकने के लिए स्थायी इंतजाम किए जाने चाहिए। इससे न केवल ग्रामीणों की आवाजाही सुगम होगी, बल्कि किसानों की फसल और कृषि भूमि को होने वाले नुकसान से भी बचाया जा सकेगा।

कई फीट पानी से होकर गुजर रहे छात्र-छात्राएं
सड़क पर पानी भरने से गांवों में रहने वाले छात्र-छात्राओं की परेशानी भी बढ़ गई है। उन्हें स्कूल और कॉलेज पहुंचने के लिए जलभराव वाले रास्तों से होकर गुजरना पड़ रहा है। अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा की चिंता सता रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर और बढ़ा तो कई गांवों के संपर्क मार्ग पूरी तरह बंद हो सकते हैं।

किसानों को सता रही नुकसान की आशंका
मालन नदी के उफान से किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। खेतों में पानी भरने से खड़ी फसलों को नुकसान होने की आशंका है। वहीं नदी के तेज बहाव से किनारे की जमीन कटने का खतरा बना हुआ है। किसानों का कहना है कि हर साल बरसात में उन्हें इसी समस्या से जूझना पड़ता है। फसल खराब होने के साथ-साथ जमीन कटने से उन्हें दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है।
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रातभर तटबंधों पर डटे रहे कर्मचारी
मालन नदी के तटबंधों पर सहायक अभियंता पीके जैन के नेतृत्व में अवर अभियंता महावीर सिंह, नरेश कुमार समेत विभागीय कर्मचारी और श्रमिक संवेदनशील क्षेत्रों में डटे रहे। विभागीय अधिकारियों ने पूरी रात निगरानी की। संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर वहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्थान पर पानी का दबाव बढ़ने या तटबंध में क्षति के संकेत मिलने पर तत्काल सुरक्षात्मक कार्य शुरू किया जाए।

मालन किनारे कटान रोकने को जारी हैं कार्य
मालन व गंगा नदी के किनारे कटान प्रभावित स्थानों पर भी सिंचाई विभाग की ओर से लगातार सुरक्षात्मक कार्य कराए जा रहे हैं। कटान वाले स्थानों पर आवश्यक सामग्री और श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, ताकि पानी बढ़ने की स्थिति में तत्काल बचाव कार्य किया जा सके।

कोट —
जेई महावीर सिंह, नरेश कुमार समेत विभागीय कर्मचारी और श्रमिक संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रहे हैं। संबंधित जेई को तटबंधों, नदी के जलस्तर और कटान प्रभावित क्षेत्रों की 24 घंटे निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
-पकंज कुमार जैन, एसडीओ सिंचाई विभाग अफजलगढ़

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