रिश्तों की डोर में बंधा अपनत्व, बहनों ने सुभाष गुप्ता की कलाई पर सजाया रक्षा सूत्र
सेवा भारती विवेकानंद विद्या मंदिर में रक्षाबंधन की भावपूर्ण तस्वीर, सुभाष गुप्ता ने बहनों की रक्षा का लिया संकल्प
गाजियाबाद।‘ना जाने क्यों कुछ रिश्ते यूं ही बन जाते हैं, कुछ रिश्ते दिल से जुड़ जाते हैं…’ रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जनपद गाजियाबाद की सेवा बस्ती नंदग्राम क्षेत्र के दीनदयाल पुरी स्थित सेवा भारती विवेकानंद विद्या मंदिर में कुछ ऐसा ही आत्मीय और भावुक दृश्य देखने को मिला। विद्यालय की शिक्षिकाओं एवं छात्राओं ने गाजियाबाद के प्रमुख समाजसेवी एवं रेडक्रॉस के निवर्तमान सभापति सुभाष गुप्ता की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और अपनत्व की खूबसूरत मिसाल पेश की। रक्षा सूत्र बंधवाते समय सुभाष गुप्ता भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि बहनों का इतना अपार प्यार और स्नेह मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। बहनों से मिलकर मन को बेहद प्रसन्नता हुई है। उन्होंने विद्यालय की शिक्षिकाओं एवं छात्राओं से रक्षा सूत्र बंधवाकर उनकी सुरक्षा, सम्मान और सहयोग का संकल्प भी लिया। रक्षाबंधन के इस अवसर पर रिश्तों की आत्मीयता के साथ समाजसेवा की भावना भी स्पष्ट दिखाई दी। सुभाष गुप्ता की सामाजिक पहचान केवल किसी पद या प्रतिष्ठा की वजह से नहीं, बल्कि वर्षों से किए जा रहे सामाजिक सरोकारों और हर वर्ग के प्रति सम्मान की भावना से बनी है। जरूरतमंदों के बीच सेवा, समाज के विभिन्न वर्गों को साथ लेकर चलने और मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता देने की उनकी कार्यशैली उन्हें अलग पहचान देती है। कार्यक्रम में रक्षा सूत्र केवल कलाई पर नहीं बंधा, बल्कि विश्वास, सम्मान और इंसानियत का रिश्ता भी मजबूत हुआ। यही रक्षाबंधन की असली खूबसूरती है—जहां रिश्ते केवल जन्म से नहीं, बल्कि भावनाओं और संवेदनाओं से भी बनते हैं। सुभाष गुप्ता ने कहा कि समाज में जब हम एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होते हैं, तभी सामाजिक सौहार्द और मानवीय रिश्ते मजबूत होते हैं। उनका संदेश साफ था—हर वर्ग के लिए समर्पित होना ही सच्ची इंसानियत है।
रक्षाबंधन का यह आयोजन इसी भावना को चरितार्थ करता नजर आया कि रिश्ते खून के ही नहीं होते, कुछ रिश्ते सेवा, स्नेह और विश्वास से भी बन जाते हैं।
‘आओ मिलकर साथ चलें, रचें नया इतिहास—इंसानियत और अपनत्व के साथ।’




