टीबी के खिलाफ सेवा का संकल्प, 31 मरीजों को मिली पोषण पोटली
रेडक्रॉस-रोटरी की पहल ने जगाया उम्मीद का उजाला
गाजियाबाद (आप अभीतक)। क्षय रोग मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी गाजियाबाद इकाई लगातार सेवा और संवेदना की मिसाल पेश कर रही है। जनपद से टीबी को जड़ से मिटाने के उद्देश्य से रेडक्रॉस द्वारा हर महीने विभिन्न अस्पतालों में चयनित पात्र क्षय रोगियों को गोद लेकर उन्हें पोषण सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार, 21 अगस्त को संजय नगर स्थित संयुक्त जिला चिकित्सालय में रोटरी क्लब गाजियाबाद ग्रेटर के सौजन्य से 31 पात्र क्षय रोगियों को पोषण पोटली वितरित की गई।
कार्यक्रम में रोटरी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट एवं रेडक्रॉस गाजियाबाद के उप संरक्षक रो. रवि बाली की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने मरीजों से आत्मीयता से मुलाकात कर उनका उत्साह बढ़ाया और नियमित दवा लेने के साथ पौष्टिक आहार को भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। रेडक्रॉस गाजियाबाद के निवर्तमान सभापति सुभाष गुप्ता ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले टीम के गठन के समय सेवा कार्यों को आगे बढ़ाने में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लेकिन पिछले दो वर्षों में रोटरी क्लब, इनर व्हील क्लब, लायंस क्लब और भारत विकास परिषद सहित विभिन्न सामाजिक संस्थाओं का सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से आज टीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य सेवा, गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने जैसे कार्य निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। कार्यक्रम में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना वर्मा, डॉ. अंकिता और सुभाष गुप्ता ने मरीजों एवं उनके परिजनों को नियमित रूप से दवाइयां लेने, उपचार बीच में न छोड़ने तथा पौष्टिक भोजन लेने के लिए प्रेरित किया। इस सेवा अभियान को सफल बनाने में संजय यादव, एम.सी. गौड़, विपिन अग्रवाल और गीता शर्मा सहित क्षय रोग विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों और कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा।
कार्यक्रम के अंत में रो. पारुल त्यागी ने मरीजों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि बीमारी के दौरान दवा के साथ प्यार, अपनापन और हौसला भी बहुत बड़ी ताकत बनता है। उन्होंने कहा कि मरीजों और उनके तीमारदारों से मिलकर आत्मिक शांति का अनुभव हुआ। ‘नर सेवा ही नारायण सेवा है’ की भावना के साथ रेडक्रॉस और सहयोगी संस्थाएं भविष्य में भी इसी तरह सेवा कार्यों को आगे बढ़ाती रहेंगी।
टीबी के खिलाफ यह पहल केवल पोषण पोटली बांटने तक सीमित नहीं, बल्कि उन परिवारों तक उम्मीद, अपनापन और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश पहुंचाने की कोशिश है, जो बीमारी के कठिन दौर से गुजर रहे हैं।




