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तुलसी जयंती पर आरबीडी महिला महाविद्यालय में अतिथि व्याख्यान

रामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण के तुलनात्मक अध्ययन पर हुई चर्चा

बिजनौर। रानी भाग्यवती देवी महिला महाविद्यालय के हिंदी विभाग में बुधवार को गोस्वामी तुलसीदास की जयंती के अवसर पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम प्राचार्या प्रो. पारुल त्यागी के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन से किया गया। इसके बाद प्राचार्या एवं मुख्य वक्ता का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।
हिंदी विभाग की ओर से आयोजित व्याख्यान का विषय ‘गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस एवं महर्षि वाल्मीकि की रामायण का तुलनात्मक अध्ययन’ रहा। मुख्य वक्ता संस्कृत विभागाध्यक्ष श्रीमती आराधना दीक्षित ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास और आदिकवि महर्षि वाल्मीकि रामकथा के दो प्रमुख आधार स्तंभ हैं। वाल्मीकि ने संस्कृत में राम के आदर्श चरित्र और मर्यादा को स्थापित किया, जबकि तुलसीदास ने अवधी भाषा में भक्ति को जन-जन तक पहुंचाया।
उन्होंने कहा कि वाल्मीकि रामायण संस्कृत भाषा में रचित आदिकाव्य है, जबकि तुलसीदास का रामचरितमानस अवधी भाषा में रचा गया। वाल्मीकि ने राम को आदर्श चरित्र और इतिहास पुरुष के रूप में प्रस्तुत किया, वहीं तुलसीदास ने उन्हें भगवान विष्णु के अवतार और मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में चित्रित किया। उन्होंने दोनों ग्रंथों में भक्ति के स्वरूप और सामाजिक संदेश की समानताओं एवं प्रमुख अंतरों पर भी प्रकाश डाला।
हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. शारदा द्विवेदी ने कहा कि दोनों ग्रंथ एक-दूसरे के पूरक हैं। वाल्मीकि ने रामकथा की नींव रखी तो तुलसी ने उस पर भक्ति का भव्य महल खड़ा किया। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास के जीवन और उनके विचारों पर भी प्रकाश डाला।
प्राचार्या प्रो. पारुल त्यागी ने हिंदी विभाग को कार्यक्रम के लिए साधुवाद देते हुए कहा कि तुलसीदास और महर्षि वाल्मीकि के राम भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम छात्राओं के लिए ज्ञानवर्धक होने के साथ उन्हें भारतीय संस्कृति और साहित्य से जोड़ने में भी सहायक हैं।
कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर वर्षा ने किया। अंत में डॉ. शारदा द्विवेदी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में हिंदी एवं संस्कृत विभाग की छात्राएं मौजूद रहीं। इस अवसर पर राजनीति विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दयावती उपाध्याय, डॉ. अल्पना सिंह सहित अन्य शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम को सफल बनाने में हिंदी विभाग की प्रवक्ता अंजली का विशेष योगदान रहा।

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