UGC Bill किसने माँगा था? अब भाजपा से हिसाब मांग रहे अमरपाल शर्मा
धर्म के बाद जाति की सियासत पर बरसे पूर्व विधायक—'समाज को बांटकर नहीं, जोड़कर आगे बढ़ेगा भारत'
गाजियाबाद। साहिबाबाद की सियासत में एक बार फिर भाईचारा बनाम बंटवारे की राजनीति का सवाल सुर्खियों में है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक एवं साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र से संभावित प्रत्याशी पंडित अमरपाल शर्मा ने आपसी भाईचारे को समर्पित बैठक में भाजपा पर सीधा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि जनता अब धर्म और जाति की बहस से आगे निकलकर रोजगार, महंगाई, विकास, शिक्षा और सम्मान के सवालों का जवाब चाहती है। अपने संबोधन में अमरपाल शर्मा ने बेहद तल्ख अंदाज में सवाल उठाया—’UGC Bill किसने मांगा था?’ उन्होंने कहा कि पहले हिंदू-मुस्लिम के नाम पर समाज को बांटने की राजनीति हुई और अब जातियों के बीच खाई पैदा करने की कोशिश दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति का तौर-तरीका अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ वाली नीति से अलग नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के मुद्दों का सामना करने के बजाय बार-बार नफरत और विभाजन की राजनीति का सहारा लेना किसी भी सरकार के लिए स्थायी रास्ता नहीं हो सकता। सवालिया लहजे में उन्होंने कहा, ‘जनता के मुद्दों पर जवाब देने के बजाय बार-बार नफरत की दुकान क्यों? आखिर कब तक धर्म और जाति के नाम पर लोगों को लड़ाते रहोगे?’
‘मेरी राजनीति कल भी भाईचारे की थी, आज भी है’
पंडित अमरपाल शर्मा ने कहा कि उनकी राजनीतिक सोच की बुनियाद हमेशा आपसी भाईचारा, जनसेवा और विकास रही है। उन्होंने कहा कि समाज को आगे ले जाने के लिए जरूरी है कि जाति, धर्म और वर्ग की दीवारों से ऊपर उठकर हर व्यक्ति को बराबरी का सम्मान मिले।
उन्होंने कहा, ‘आपसी भाईचारे की आवाज में यकीन करो, सब कुछ बेहतर भी होगा और बेहतरीन भी।’ उनके इस संदेश को बैठक में मौजूद लोगों ने सामाजिक एकता और सद्भाव की अपील के रूप में देखा।
‘जनता सब समझ चुकी है’
भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए अमरपाल शर्मा ने कहा कि जनहित और विकास के मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाना सरकार की नीति का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने दावा किया कि अब लोगों को वास्तविकता समझ में आने लगी है और समाज का हर वर्ग बदलाव की ओर देख रहा है। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग अपनी बात खुलकर नहीं कह पाते, लेकिन उनके मन में क्या चल रहा है, यह चुनाव के समय साफ दिखाई देगा। ‘पाप का घड़ा जब भर जाता है तो छलकना भी लाजिमी है,’ कहते हुए उन्होंने कहा कि 2027 में जनता अपने मत के माध्यम से जवाब देने के लिए तैयार है।
‘2027 में जनता बोलेगी—बैलेट से’
पूर्व विधायक ने कहा कि प्रदेश की जनता अब ऐसी राजनीति चाहती है जिसमें नफरत से ज्यादा विकास, विवाद से ज्यादा रोजगार और विभाजन से ज्यादा भाईचारे की बात हो। उन्होंने कहा कि आने वाला विधानसभा चुनाव इस बात का फैसला करेगा कि जनता किस तरह की राजनीति को स्वीकार करती है। अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न वर्गों में नेतृत्व को लेकर उम्मीद दिखाई दे रही है। उन्होंने दावा किया कि आने वाला समय इस बात का गवाह बनेगा कि जनता ने अपने लिए क्या रास्ता चुना है।
सियासत का संदेश साफ—’लड़ाना नहीं, जोड़ना है’
बैठक का केंद्रीय संदेश यही रहा कि राजनीति अगर जनता के बीच विश्वास पैदा करे तो वह विकास की ताकत बन सकती है, लेकिन अगर समाज को बांटने का माध्यम बने तो लोकतंत्र कमजोर होता है। अमरपाल शर्मा ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से आह्वान किया कि वे आपसी भाईचारे, सामाजिक सद्भाव और जनहित को अपनी प्राथमिकता बनाएं।
साहिबाबाद की सियासत में अमरपाल शर्मा के इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। उनके संबोधन ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि आने वाले चुनाव में धर्म और जाति की राजनीति भारी पड़ेगी या विकास और भाईचारे का मुद्दा जनता के फैसले की दिशा तय करेगा।




