रक्षाबंधन से पहले खाकी ने थामा इंसानियत का हाथ
नेत्रहीन दिव्यांग को सड़क पार कराकर खोड़ा थाना प्रभारी नरेश शर्मा ने पेश की संवेदनशीलता की मिसाल
गाजियाबाद। रक्षाबंधन से ठीक पहले गाजियाबाद के खोड़ा क्षेत्र से खाकी का एक ऐसा मानवीय चेहरा सामने आया, जिसने वर्दी के प्रति लोगों के भरोसे को और मजबूत कर दिया। कानून-व्यवस्था संभालने वाली पुलिस जब जरूरतमंद का सहारा बनती है तो उसका यह छोटा-सा प्रयास भी समाज के लिए बड़ा संदेश बन जाता है। खोड़ा थाना प्रभारी नरेश शर्मा ड्यूटी के दौरान क्षेत्र के भीड़भाड़ वाले इलाके में मौजूद थे। इसी बीच उनकी नजर एक नेत्रहीन दिव्यांग व्यक्ति पर पड़ी, जो सड़क पार करने के लिए असहाय दिखाई दे रहे थे। आसपास वाहनों और राहगीरों की आवाजाही के बीच उसे सुरक्षित सड़क पार करने में परेशानी हो रही थी।
स्थिति को देखते ही थाना प्रभारी ने बिना किसी औपचारिकता और देरी के स्वयं आगे बढ़कर उसकी मदद की। उन्होंने दिव्यांग व्यक्ति का हाथ थामा और उसे सावधानीपूर्वक सड़क पार कराकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। इस दौरान उनके व्यवहार में अधिकारी का रौब नहीं, बल्कि एक संवेदनशील नागरिक की सहजता नजर आई।
वर्दी के पीछे दिखा संवेदनशील इंसान
मौके पर मौजूद लोगों ने जब पुलिस अधिकारी को अपनी ड्यूटी के बीच एक दिव्यांग व्यक्ति का सहारा बनते देखा तो उनकी सराहना किए बिना नहीं रह सके। लोगों का कहना था कि पुलिस की भूमिका केवल अपराध रोकने और कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय आम आदमी के साथ खड़ा होना भी पुलिसिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
थाना प्रभारी नरेश शर्मा का यह छोटा-सा प्रयास भले ही कुछ क्षणों का रहा हो, लेकिन इसने पुलिस और जनता के बीच विश्वास की उस डोर को मजबूत करने का काम किया, जिसकी बुनियाद संवेदनशीलता और सहयोग पर टिकी होती है।
रक्षाबंधन से पहले मिला भरोसे का संदेश
रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह, सुरक्षा और विश्वास का पर्व है। ऐसे अवसर से ठीक पहले खाकी का यह मानवीय रूप सामने आना अपने आप में खास संदेश देता है—सुरक्षा केवल कानून की किताबों में नहीं, बल्कि जरूरत के समय किसी का हाथ थाम लेने में भी दिखाई देती है।
खोड़ा थाना प्रभारी नरेश शर्मा का यह व्यवहार क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा। लोगों ने इसे पुलिस की सकारात्मक छवि से जोड़ते हुए कहा कि जब वर्दी के साथ इंसानियत कदम से कदम मिलाकर चलती है, तो पुलिस और जनता के बीच दूरी कम होती है और भरोसा और गहरा होता है।
एक हाथ बढ़ा, एक राह आसान हुई—और खाकी की तस्वीर में इंसानियत का रंग और गहरा हो गया।




