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बारिश ने खोल दी विकास की ‘पोल’, सड़कें बनीं तालाब, नाले-नालियां हुईं चोक
बरेली। “स्मार्ट सिटी का कमाल देखिए… छाता लेकर निकलिए तो सड़क नहीं, नाव की जरूरत पड़ती है। नाले-नालियां चोक हैं और विकास का पानी पूरे शहर में बह रहा है!”
शहर में हुई बारिश ने एक बार फिर नगर निगम की जलनिकासी व्यवस्था के दावों की परीक्षा ले ली। बारिश शुरू होते ही कई इलाकों में सड़कें पानी से लबालब हो गईं। नाले और नालियां चोक होने से पानी सड़कों से होता हुआ घरों के आसपास तक पहुंच गया। लोगों को जलभराव के बीच आवागमन करना पड़ा।
शहरवासियों का कहना है कि बारिश से पहले नालों की सफाई के दावे तो खूब किए जाते हैं, लेकिन बारिश होते ही सारी तैयारियां पानी में बहती नजर आती हैं। जलभराव ने स्मार्ट सिटी की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो में भी जलभराव की स्थिति साफ दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के बावजूद यदि एक बारिश में सड़कें तालाब बन जाएं तो स्मार्ट सिटी के दावों पर सवाल उठना लाजिमी है।
बारिश से पहले सफाई के दावे, बारिश में व्यवस्था बेपर्दा
शहरवासियों का कहना है कि बारिश से पहले नालों की सफाई और जलभराव से निपटने की तैयारियों के दावे खूब किए जाते हैं, लेकिन बारिश की कुछ बूंदें ही इन दावों की हकीकत सामने ला देती हैं। करोड़ों रुपये के विकास कार्यों और स्मार्ट सिटी योजनाओं के बीच यदि एक बारिश में सड़कें तालाब बन जाएं तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर स्मार्ट सिटी का फायदा शहरवासियों को कब मिलेगा।
लोगों की जुबां पर ‘स्मार्ट सिटी’ का सवाल
मयंक ने कहा कि बारिश के दौरान सड़क पर निकलना मुश्किल हो गया है। नालियों की नियमित सफाई होती तो पानी इतनी देर तक सड़कों पर नहीं भरा रहता। स्मार्ट सिटी के नाम पर योजनाएं तो बहुत हैं, लेकिन आम आदमी को जलभराव से राहत चाहिए।
स्थानीय निवासी अनिल ने कटाक्ष करते हुए कहा, “मेयर साहब की स्मार्ट सिटी में बारिश ने ऐसा स्मार्ट इंतजाम किया है कि सड़कें खुद तालाब बन गईं। अब नगर निगम को सड़क के साथ नाव चलाने की सुविधा भी शुरू कर देनी चाहिए।”
निवासी नीलम का कहना है, “हर साल बारिश से पहले नाले साफ कराने की बात कही जाती है। फिर बारिश आते ही वही नाले जवाब दे देते हैं। अगर सफाई हुई है तो उसका असर पानी निकलने में क्यों नहीं दिखाई देता?”
दुकानदार संतोष ने कहा, “जलभराव से सबसे ज्यादा परेशानी दुकानदारों और राहगीरों को होती है। ग्राहक दुकान तक पहुंच नहीं पाते और पानी घंटों सड़क पर जमा रहता है। स्मार्ट सिटी का मतलब सिर्फ बड़े-बड़े प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि बारिश में सूखी सड़कें भी होनी चाहिए।”
मेयर के स्मार्ट सिटी दावों पर उठे सवाल
डा.शाहजेब का कहना है कि शहर में स्मार्ट सिटी के नाम पर लगातार विकास और बेहतर सुविधाओं के दावे किए जाते रहे हैं। लेकिन बारिश के बाद सामने आई तस्वीरें इन दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। लोगों का कहना है कि स्मार्ट सिटी की असली परीक्षा चमकदार परियोजनाओं से नहीं, बल्कि बारिश के दौरान जलनिकासी की व्यवस्था से होती है।
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो में भी शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति दिखाई दे रही है। अब सवाल यही है कि मेयर की स्मार्ट सिटी में बारिश का पानी आखिर कब स्मार्ट तरीके से निकलेगा?




