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सात साल बाद भी कोरोना का बहाना!

 जल जीवन मिशन की सुस्ती पर केंद्र का जवाब, बरेली-बदायूं के सैकड़ों गांव अब भी इंतजार में

बरेली/नई दिल्ली। जल जीवन मिशन की धीमी रफ्तार को लेकर आंवला से समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज मौर्य द्वारा लोकसभा में उठाए गए सवाल पर केंद्र सरकार ने स्वीकार किया है कि बरेली और बदायूं में योजना अब तक पूरी नहीं हो सकी है। हैरानी की बात यह है कि सरकार ने देरी के प्रमुख कारणों में कोविड-19 महामारी, मानव संसाधन की कमी और आपूर्ति संबंधी बाधाओं का हवाला दिया है, जबकि महामारी को समाप्त हुए कई वर्ष बीत चुके हैं।
जल शक्ति मंत्रालय के लिखित उत्तर के अनुसार बरेली के 1,866 गांवों में से केवल 575 गांवों और बदायूं के 1,476 गांवों में से 709 गांवों में ही शत-प्रतिशत हर घर नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराए जा सके हैं। यानी दोनों जिलों के बड़ी संख्या में गांव अब भी योजना के पूर्ण लाभ से वंचित हैं।
सांसद नीरज मौर्य ने लोकसभा में अधूरी पेयजल योजनाओं, पाइपलाइन बिछाने के बाद खराब छोड़ दी गई सड़कों और कार्यों में हो रही देरी का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में मंत्रालय ने बताया कि बरेली के 435 गांवों और बदायूं के 616 गांवों में सड़क मरम्मत का कार्य अभी लंबित है। इनमें आंवला संसदीय क्षेत्र के बदायूं हिस्से के 276 गांव भी शामिल हैं, जहां खुदाई के बाद सड़कें अब तक पूरी तरह दुरुस्त नहीं की गई हैं।
मंत्रालय ने बताया कि परियोजनाओं में देरी के पीछे कोविड-19 महामारी, श्रमिकों की कमी, निर्माण सामग्री की उपलब्धता में बाधा और अन्य तकनीकी कारण रहे। हालांकि विपक्ष ने इस तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि महामारी समाप्त हुए वर्षों बीत चुके हैं, फिर भी अधूरे कार्यों के लिए कोरोना को जिम्मेदार ठहराना सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में अधूरी पाइपलाइन, उखड़ी सड़कें और अधूरे निर्माण कार्य लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पेयजल योजना का लाभ मिलने के बजाय उन्हें धूल, कीचड़ और टूटी सड़कों की समस्या झेलनी पड़ रही है।
सांसद नीरज मौर्य ने मांग की है कि जल जीवन मिशन के शेष कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाए और जिन गांवों में सड़कें खुदाई के बाद बदहाल हैं, वहां तत्काल मरम्मत कराकर ग्रामीणों को राहत दी जाए।

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