विजय नगर डीपीएस स्कूल के सामने ग्रीन जोन में वर्षों से अवैध कब्जे का आरोप
सब्जी के ठेले, सिलाई मशीन और पटरी कारोबार से सार्वजनिक एवं हरित क्षेत्र प्रभावित होने का दावा—स्थानीय लोगों ने स्थलीय निरीक्षण और कार्रवाई की मांग की
गाजियाबाद। विजय नगर स्थित डीपीएस स्कूल के सामने, सिद्धार्थ नगर–विजय नगर चौराहे के पास तथा विधायक संजीव शर्मा के आवास के आसपास ग्रीन जोन और डिवाइडर क्षेत्र में वर्षों से अवैध कब्जे होने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां लंबे समय से सब्जी के ठेले, सिलाई मशीन लगाकर सामान बेचने वाले तथा अन्य पटरी विक्रेता ग्रीन जोन क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए अपना कारोबार कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सार्वजनिक उपयोग और हरित क्षेत्र के लिए निर्धारित इस स्थान पर लंबे समय से अनेक ठेले और पटरी विक्रेता कारोबार कर रहे हैं। इससे सड़क एवं आसपास के क्षेत्र में यातायात और पैदल आवागमन प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है।
लोगों का कहना है कि स्कूलों के आसपास हरित क्षेत्र की सुरक्षा तथा पेड़-पौधों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, लेकिन उक्त स्थान पर ऐसा दिखाई नहीं देता। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि वर्षों से यहां इतने बड़े स्तर पर अस्थायी कब्जे हैं तो संबंधित विभागों द्वारा नियमित निरीक्षण और कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
ग्रीन जोन की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था की मांग
स्थानीय लोगों ने नगर निगम, यातायात पुलिस, जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, महापौर, नगर आयुक्त एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मौके का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है। साथ ही यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि उक्त भूमि का वास्तविक भू-उपयोग क्या है और यदि कब्जे अवैध पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
लोगों ने मांग की है कि सड़क के बीच स्थित ग्रीन जोन की सुरक्षा के लिए आवश्यक स्थानों पर खंभे और तार लगाए जाएं, ताकि अवैध कब्जे और आवारा पशुओं की आवाजाही को रोका जा सके। इसके अलावा नगर निगम द्वारा मौके पर सूचना-पट्ट या नोटिस बोर्ड लगाया जाए, जिसमें ग्रीन जोन में अवैध कब्जा करने पर जुर्माने और कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान लिखा हो।
दुकानदारों के लिए नियम और पटरी कब्जों पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि सामान्य दुकानों और प्रतिष्ठानों को किराया, कर एवं अन्य नियमों का पालन करना पड़ता है और सरकार को कर के रूप में राजस्व दिया जाता है। ऐसे में सड़क और सार्वजनिक भूमि पर अस्थायी रूप से कारोबार करने वालों के संबंध में भी नियमों का समान रूप से पालन कराया जाना चाहिए। लोगों का आरोप है कि अवैध कब्जे के कारण वैध रूप से कारोबार करने वाले दुकानदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि ऐसे पटरी क्षेत्रों के आसपास पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे नहीं होने से निगरानी व्यवस्था कमजोर रहती है। स्थानीय स्तर पर यह आशंका भी व्यक्त की गई है कि ऐसी जगहों का फायदा असामाजिक तत्व अथवा नकली मुद्रा चलाने वाले लोग उठा सकते हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति या दुकानदार के खिलाफ नकली मुद्रा से संबंधित शिकायत सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार पीड़ित दुकानदार स्वयं को बचाने के लिए अनजाने में नकली नोट आगे चला देता है, जिसके कारण वास्तविक स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इस प्रकार की किसी भी गतिविधि की पुष्टि केवल पुलिस जांच के बाद ही हो सकती है।
ग्रीन जोन और पेड़-पौधों की सुरक्षा का मामला
स्थानीय लोगों के अनुसार, ग्रीन जोन की उचित घेराबंदी नहीं होने के कारण आवारा पशुओं का समूह यहां पहुंच जाता है और पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाता है। लोगों का कहना है कि यदि क्षेत्र में तार, खंभे अथवा अन्य सुरक्षा व्यवस्था की जाए और नियमित निगरानी हो तो ग्रीन जोन को सुरक्षित रखा जा सकता है।
स्थानीय लोगों ने नगर निगम और विधायक संजीव शर्मा से भी इस मामले में गंभीरता से संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि ग्रीन जोन को अवैध कब्जों से मुक्त कराकर पेड़-पौधों की सुरक्षा, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सीसीटीवी निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
मांग है कि संबंधित विभाग मौके पर निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करें और यदि अवैध कब्जे पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।




