उर्स-ए-शराफती का कुल की रस्म के साथ समापन, उमड़ा जायरीन का हुजूम
बरेली। विश्वविख्यात सूफी संत शाह मौलाना शराफत अली मियां का उर्स-ए-शराफती मंगलवार को कुल की रस्म के साथ संपन्न हुआ। उर्स के अंतिम दिन खानकाह शरीफ में देश-विदेश से पहुंचे बड़ी संख्या में जायरीन ने शिरकत की। इस दौरान देश में अमन-चैन, भाईचारे और आपसी एकता के लिए विशेष दुआ की गई।
सुबह से ही जायरीन के खानकाह शरीफ पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। सुबह करीब 11 बजे कुल शरीफ की महफिल आयोजित हुई। खानकाह शरीफ के सज्जादानशीन शाह मोहम्मद गाजी मियां ने कुल शरीफ की रस्म अदा कराई। कुल के दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। खानकाह शरीफ के आसपास की गलियां भी जायरीन की भीड़ से भर गईं।
कुल की रस्म के बाद देश की खुशहाली, तरक्की और अमन-चैन के लिए विशेष दुआ की गई। इसके बाद अकीदतमंदों ने मजार-ए-पाक पर हाजिरी दी और गुलपोशी की। कुल की रस्म संपन्न होने के बाद भी मजार पर जायरीन के पहुंचने का सिलसिला देर तक जारी रहा।
इंसानियत और मोहब्बत का दिया संदेश
इस अवसर पर खानकाह शरीफ की ओर से इंसानियत, मोहब्बत और आपसी भाईचारे का संदेश दिया गया। सज्जादानशीन शाह मोहम्मद गाजी मियां ने कहा कि बुजुर्गाने दीन की शिक्षाएं इंसानियत की सेवा, प्रेम और आपसी मेल-जोल का रास्ता दिखाती हैं। उन्होंने अकीदतमंदों से इन शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारने और समाज में शांति, प्रेम तथा एकता को मजबूत करने का आह्वान किया।
उर्स के समापन के साथ खानकाह शरीफ में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों का दौर संपन्न हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में जायरीन, मुरीदीन और स्थानीय लोग मौजूद रहे।




