बदमाशों से बचकर भागे मुश्ताक तो बिजनौर वालों ने दिया था सहारा
मुश्ताक खान को मस्जिद में मिली थी पनाह
-चाहशीरी के बुजुर्ग ने सात घंटे घर में रखा था मुश्ताक खान को
-स्थानीय लोगों की मदद से सुरक्षित गाजियाबाद पहुंचे थे मुश्ताक
-बाद में मुश्ताक ने बिजनौर वालों का जताया था आभार
बिजनौर। हास्य कलाकार एवं अभिनेता मुश्ताक खान के लिए 21 नवंबर 2024 की सुबह जिंदगी भर याद रहने वाली रही। एक रात पहले अपहरण कर बिजनौर लाए गए मुश्ताक खान मौका पाकर बदमाशों के चंगुल से निकल भागे। बदहवास हालत में वह चाहशीरी स्थित नूरुल हुदा मस्जिद पहुंचे। यहां एक बुजुर्ग ने उन्हें पहचान लिया। मुश्ताक को देखकर बुजुर्ग ने तत्काल उन्हें सुरक्षित अपने घर पहुंचाया और परिजनों से संपर्क कराया।
मुश्ताक खान करीब सात घंटे तक उस परिवार के घर में रहे। परिवार ने उनकी पहचान छिपाए रखी, चेहरे को कपड़े से ढककर रखा और बदमाशों से बचाने के लिए पूरी सावधानी बरती। परिजनों से वीडियो कॉल पर बात होने के बाद मुश्ताक कुछ शांत हुए। बाद में उनकी टीम बिजनौर पहुंची और उन्हें सुरक्षित अपने साथ ले गई।
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नगर पालिका चौराहे पर जुट गए थे लोग
मुश्ताक को लेकर जब स्थानीय लोग नगर पालिका चौराहे तक पहुंचे तो उन्हें लेने आई टीम के सामने बड़ी संख्या में लोग जुट गए। मुश्ताक ने अपनी टीम को बताया कि इसी युवक के घर में शरण मिलने से उनकी जान बच पाई। इसके बाद लोगों ने मदद करने वाले परिवार का शुक्रिया अदा किया और मुश्ताक को सुरक्षित वाहन में बैठाकर गाजियाबाद रवाना किया।
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मदद को लेकर की थी बिजनौर वालों की तारीफ
बाद में मुश्ताक खान ने पूरे घटनाक्रम को याद करते हुए बिजनौर के लोगों की मदद की सराहना की थी। उन्होंने बताया था कि बदमाशों से निकलने के बाद रास्ते में एक टेंपो चालक ने भी उनकी मदद की और मस्जिद तक पहुंचने का रास्ता बताया। मस्जिद पहुंचने के बाद स्थानीय लोगों ने उन्हें सहारा दिया और परिजनों से संपर्क कराया।
अपहरण के इस मामले का पुलिस ने बाद में खुलासा किया था। मुश्ताक खान को बंधक बनाकर फिरौती वसूलने वाले गिरोह के सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद पूरी घटना सामने आई। लेकिन इस घटना में बिजनौर के उन लोगों की भूमिका भी सामने आई, जिन्होंने डर और जोखिम के बावजूद परेशानहाल मुश्ताक खान को शरण दी और सुरक्षित उनके परिवार तक पहुंचाने में मदद की।




