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यूपी के गांवों में चल रहा था साइबर ठगों का खेल

सस्ते इलाज का झांसा देकर करोड़ों की ठगी

नई दिल्ली। सस्ते इलाज और मुफ्त दवाइयों का लालच देकर उत्तर प्रदेश के कई जिलों के गांवों में घूम-घूमकर फर्जी हेल्थ कैंप लगाकर ग्रामीणों से आधार और बायोमीट्रिक डिटेल जुटाते थे। इनका इस्तेमाल कर फिजिकल सिम और ई-सिम एक्टिवेट करा लेते थे। फिर इन सिम को आॅनलाइन संपर्क के जरिए साइबर ठगों को बेच देते थे। दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक आॅपरेशंस (कऋरड) यूनिट ने डिजिटल अरेस्ट के एक मामले की जांच करते हुए मथुरा से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों ने पिछले एक साल में 3000 से ज्यादा सिम एक्टिवेट कर बेचे। जांच में 20 से ज्यादा साइबर क्राइम शिकायतों के तार इनसे जुड़े मिले हैं, जिनमें करीब 2.64 करोड़ रुपये की ठगी की आशंका है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मथुरा निवासी जितेंद्र सिंह (29) और ब्रजेश कुमार (21) के रूप में हुई है। आईएफएसओ डीसीपी गौरव त्यागी ने बताया कि आरोपी लखनऊ, मथुरा और अयोध्या के गांवों में फर्जी हेल्थ कैंप लगाकर लोगों को सस्ते इलाज और रियायती दवाइयों का भरोसा दिलाते थे। इस बहाने उनके आधार और बायोमीट्रिक डिटेल हासिल कर ली जाती थी। पुलिस अब जांच कर रही है कि इन जानकारियों का इस्तेमाल कितने लोगों के नाम पर सिम जारी कराने में किया गया। आईएफएसओ एसीपी विवेकानंद झा के नेतृत्व वाली टीम की जांच में सामने आया कि आरोपी आॅनलाइन ग्रुप और सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म के जरिए सिम के खरीदारों से संपर्क करते थे। वे फिजिकल सिम को ई-सिम में बदलकर उसके क्यूआर कोड भी आगे भेजते थे। एक ई-सिम करीब 800 से 1200 रुपये में खरीदकर उसे लगभग 2000 रुपये में बेचने की बात सामने आई है। लेनदेन के लिए वरऊळ क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किए जाने का भी शक है। जंच में विदेशी संपर्कों और सिम-बॉक्स सिस्टम के संभावित इस्तेमाल की कड़ियां भी सामने आई है।

डिजिटल अरेस्ट केस से खुला नेटवर्क
यह जांच 1.64 करोड़ रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी से शुरू हुई थी। दिल्ली में रहने वाले एक पीड़ित को करीब दो सप्ताह तक वाट्सऐप पर कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर छह अलग-अलग बैंक खातों में छह फळॠर ट्रांजैक्शन के जरिए रकम ट्रांसफर कराई गई थी। तकनीकी जांच आरोपियों तक पहुंची। पुलिस ने मथुरा में छापा मारकर दोनों को पकड़ा और तीन मोबाइल फोन बरामद किए। आरोपियों के सिम 20 से ज्यादा शिकायतों से जुड़े मिले हैं। अब इनके खरीदारों, विदेशी संपर्कों और साइबर ठगी में इस्तेमाल हुए सिम की पड़ताल की जा रही है।

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