सीतापुर: चलने लायक सड़कों का हो रहा पुनर्निर्माण
15-25 साल से जर्जर सड़कें अब भी बजट का इंतजार कर रही हैं
सीतापुर। शहर में एक ओर ऐसी सड़कों का निर्माण और पुनर्निर्माण कराया जा रहा है जो अभी चलने योग्य हैं, वहीं दूसरी ओर कई मोहल्लों की सड़कें पिछले 15 से 25 वर्षों से मरम्मत और पुनर्निर्माण की बाट जोह रही हैं। जिम्मेदार विभागों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान न पहुंचने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
शहरवासियों का कहना है कि विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन कई इलाकों में सड़कें इतनी खराब हो चुकी हैं कि लोग रोजाना परेशान हैं। कई जगह गड्ढे मोहल्लेवासी खुद मिट्टी, ईंट और मलबा डालकर भरने को मजबूर हैं।
ब्रह्मपुरी की सड़क का निरीक्षण हुए दो साल, निर्माण नहीं
ब्रह्मपुरी मोहल्ले की सड़क लंबे समय से जर्जर है। करीब दो वर्ष पहले निरीक्षण हुआ था, लेकिन बजट के अभाव में आज तक निर्माण नहीं हो सका। लोगों का सवाल है कि प्रस्ताव और निरीक्षण पूरा होने के बाद भी बजट आवंटन में देरी क्यों?
प्रस्ताव विभागों में लंबित, विकास कागजों तक सीमित
कई सड़कों के प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग और डूडा स्तर पर लंबित हैं। बजट न मिलने से प्रस्ताव फाइलों तक सीमित रह गए हैं। सीतापुर विधानसभा का प्रतिनिधित्व नगर विकास राज्यमंत्री राकेश राठौर ‘गुरु’ कर रहे हैं। जिन क्षेत्रों में बजट मिल रहा है वहां काम दिख रहा है, लेकिन पुरानी सड़कों के लिए बजट नहीं मिल पा रहा।
वीआईपी कहलाने वाली चर्च रोड भी बदहाल
कभी वीआईपी कही जाने वाली चर्च रोड से कोतवाली चौराहे तक, एसपी कार्यालय से लोहा बाजार, लोहार बाग चौराहा, घूरामऊ बंगला से एनसीसी चौराहा और बड़े डाकखाने तिराहे से रोडवेज बस स्टैंड तक जगह-जगह गड्ढे हैं। इन मार्गों से रोज हजारों लोग गुजरते हैं।
गड्ढे खुद भर रहे नागरिक
बरसात में गड्ढों में पानी भरने से राहगीरों, दोपहिया चालकों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानी होती है। नागरिकों का कहना है कि आश्वासन तो मिलते हैं, लेकिन बजट कब आएगा इसकी जानकारी नहीं।
छोटी सड़कों पर भी ध्यान देने की मांग
नगरपालिका क्षेत्र की छोटी-छोटी सड़कें भी मरम्मत की प्रतीक्षा में हैं। लोगों की मांग है कि प्राथमिकता तय करते समय वास्तव में जर्जर और लंबे समय से उपेक्षित मोहल्लों को प्राथमिकता दी जाए। लोगों ने शासन-प्रशासन से लंबित प्रस्तावों की समीक्षा कर बजट उपलब्ध कराने और समयबद्ध निर्माण की मांग की है।




