पीली डैम की सुरक्षा का होगा व्यापक मूल्यांकन, विशेषज्ञ पैनल ने किया निरीक्षण
बांध सुरक्षा अधिनियम-2021 के तहत शुरू हुई सीडीएसई की प्रक्रिया, रिपोर्ट के आधार पर बनेगी नवीनीकरण और सुदृढ़ीकरण की डीपीआर।
रेहड़, संवाददाता। सिंचाई सुविधा और बाढ़ नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे पीली डैम की सुरक्षा और संरचनात्मक स्थिति का अब व्यापक तकनीकी मूल्यांकन किया जा रहा है। करीब 60 साल से क्षेत्र की जीवनरेखा बने इस बांध के आधुनिकीकरण और सुरक्षा सुदृढ़ीकरण की दिशा में इसे अहम पहल माना जा रहा है।
पीली डैम का निर्माण 1962 में शुरू हुआ था और 1966 में पूरा हुआ। 1966 से यह बांध लगातार सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने के साथ मानसून में बाढ़ प्रबंधन में भी अहम भूमिका निभा रहा है। दीर्घकालीन उपयोग को देखते हुए अब इसकी संरचनात्मक स्थिति, जल प्रबंधन प्रणाली, सुरक्षा उपकरणों और हाइड्रो-मैकेनिकल व्यवस्थाओं का तकनीकी परीक्षण किया जा रहा है।
एनडीएसए के दिशा-निर्देशों पर विशेषज्ञ पैनल गठित
राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों और बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के प्रावधानों के तहत पीली डैम के आईपीओई का गठन किया गया है।
पैनल में शामिल विशेषज्ञ:
– डॉ. विनोद कुमार शर्मा – भू-वैज्ञानिक – अध्यक्ष
– राजीव सचदेवा – डैम सेफ्टी एक्सपर्ट – सदस्य
– डॉ. अनिल कुमार लोहानी – हाइड्रोलॉजिस्ट – सदस्य
– विनीत भाटिया – हाइड्रो-मैकेनिकल एक्सपर्ट – सदस्य
– अधीक्षण अभियंता, रोहिलखंड, बांध सुरक्षा मंडल, लखनऊ – सदस्य
– अधीक्षण अभियंता, सिंचाई कार्य मंडल, मुरादाबाद – सदस्य सचिव
अधिकारियों की मौजूदगी में स्थलीय निरीक्षण
विशेषज्ञ पैनल ने अधिकारियों की मौजूदगी में पीली डैम का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान अधीक्षण अभियंता, सिंचाई कार्य मंडल, मुरादाबाद राजीव मित्तल, अधिशासी अभियंता अरुण सचदेवा, एसडीओ पंकज कुमार जैन सहित विभागीय अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
पैनल ने बांध के विभिन्न महत्वपूर्ण हिस्सों, जल प्रबंधन व्यवस्थाओं, सुरक्षा उपकरणों और हाइड्रो-मैकेनिकल सिस्टम की वर्तमान स्थिति का तकनीकी जायजा लिया।
रिपोर्ट के बाद तैयार होगी डीपीआर
निरीक्षण के बाद पैनल द्वारा विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट में बांध की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आवश्यक संरचनात्मक सुधार, सुरक्षा उपकरण और अन्य कार्यों को चिन्हित किया जाएगा।
इसी रिपोर्ट के आधार पर परियोजना / डीपीआर तैयार कर शासन को स्वीकृति के लिए भेजी जाएगी। स्वीकृति मिलने के बाद नवीनीकरण, आधुनिकीकरण और सुरक्षा सुदृढ़ीकरण के कार्य शुरू होंगे।
60 वर्ष की यात्रा पूरी कर चुका पीली डैम आज भी क्षेत्र की सिंचाई और बाढ़ से सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। सीडीएसई की यह प्रक्रिया भविष्य में इसकी सुरक्षा, विश्वसनीयता और कार्यक्षमता को और बेहतर बनाने में वैज्ञानिक आधार प्रदान करेगी।




