रक्षाबंधन पर मानवता की अनोखी मिसाल
जरूरतमंद भाइयों के बीच पहुंचीं समाजसेवी स्तुति गुप्ता
गाजियाबाद। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर जब लोग अपने परिवारों के साथ त्योहार की खुशियां मना रहे थे और देर रात अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे, उसी समय मानवता संगठन की समाजसेवी एवं प्रसिद्ध इन्फ्लुएंसर स्तुति गुप्ता संगठन के साथियों मधुर गुप्ता, वरुण और कार्तिक के साथ जरूरतमंद लोगों के बीच पहुंचीं और उन्हें भोजन कराया।
मानवता संगठन की टीम देर रात शहर में भोजन वितरण कर रही थी। इस दौरान संगठन के सदस्यों ने फुटपाथ पर सो रहे जरूरतमंद भाइयों को भोजन कराया। रक्षाबंधन के दिन जब उन्हें भोजन मिला तो कई भाइयों ने भावुक होकर स्तुति गुप्ता से कहा, “बहन, आपको कभी हमारी जरूरत पड़े तो हमें याद करना। हम भले ही पैसों से आपके साथ खड़े न हो सकें, लेकिन आपके भाई बनकर हमेशा आपके साथ खड़े रहेंगे।”
इन शब्दों ने पूरे माहौल को भावुक कर दिया। यह केवल भोजन वितरण नहीं, बल्कि अनजान लोगों के बीच भाई-बहन के रिश्ते और अपनत्व की एक मिसाल बन गया।
इस अवसर पर मानवता संगठन के संस्थापक मधुर गुप्ता ने कहा कि समाज में बहुत से लोग आज भी अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। मानवता संगठन ऐसे जरूरतमंद लोगों को सहारा देने और उन्हें बेहतर जीवन की ओर आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
मधुर गुप्ता ने कहा, “त्योहार तभी अच्छा लगता है जब हर भाई अपनी बहन के साथ खड़ा हो। छोटा भाई स्नेह करता है और बड़ा भाई उसकी ढाल बनकर उसे सुरक्षा और आशीर्वाद देता है।”
इसी भावना को ध्यान में रखते हुए स्तुति गुप्ता ने रक्षाबंधन पर जरूरतमंद भाइयों के लिए भोजन की व्यवस्था कराई, ताकि त्योहार के दिन कोई भाई खुद को अकेला महसूस न करे और उसके चेहरे पर भी मुस्कान आए। उनके लिए यह केवल भोजन नहीं, बल्कि एक बहन का अपने भाइयों के प्रति प्रेम और सम्मान था।
मानवता संगठन का संदेश स्पष्ट है कि हमें यह नहीं देखना चाहिए कि सामने वाला हमारा अपना भाई है या कोई अनजान व्यक्ति। भारत की संस्कृति हमें यही सिखाती है कि पूरा समाज एक परिवार है। हर व्यक्ति को करुणामयी भाव से देखना, जरूरत के समय उसका साथ देना और मानवता के रिश्ते को मजबूत करना ही सच्ची सेवा है।
रक्षाबंधन की इस पहल ने यह संदेश दिया कि रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और मानवता से भी बनते हैं।




