समस्याओं को बढ़ावा दे रही अधिकारियों की फोन ना उठाने की आदत
गाजियाबाद। जीडीए और नगर निगम या अन्य कोई भी सरकारी विभाग, लोगों की सुविधाओं के लिए बनाए गए हैं। जब कोई किसी क्षेत्र से जुड़ी किसी समस्या से अधिकारियों को अवगत कराना चाहता है तो, या तो वह सीधे जाकर संबंधित अधिकारियों से मिलेगा या फिर फोन के माध्यम से ही अपनी समस्या संबंधित अधिकारी को बताएगा। इसके लिए सरकार ने अधिकारियों को सीयूजी नंबर उपलब्ध कराए हैं जिन पर वह आम लोगों की समस्याओं को सुन सकें, लेकिन अगर नगर निगम और जीडीए के अधिकारियों की फोन उठाने के प्रति उदासीनता को देखें तो यही महसूस होगा कि सीयूजी नंबर सिर्फ दिखाने के लिए ही अधिकारियों ने अपने पास रखे हुए हैं। उक्त दोनों ही विभागों के ज्यादातर अधिकारी ना तो फोन उठाते हैं और ना ही कॉल बैक करते हैं। ऐसा नहीं है कि अधिकारियों की इस उदासीनता का शिकार केवल आम लोग ही हो रहे हैं, बल्कि पत्रकारों के फोन भी ना उठाए जाना अब आम बात हो चली है। ऐसे अधिकारियों की फेहरिस्त काफी लंबी है जो या तो कॉल को अपने पीए आदि को ट्रांसफर कर देते हैं या फिर कॉल को वॉइस मेल पर डाल कर इतिश्री कर लेते हैं। जिन अधिकारियों की हम बात कर रहे हैं उनमें आला अधिकारियों से लेकर जेई, एई, सुपरवाइजर भी शामिल हैं। इसका एक उदाहरण हाल ही में तब देखने को मिला जब अपनी शिकायत लेकर एक शख्स नगर निगम मुख्यालय पहुंचा था। उसने जनसुनवाई के दौरान नगर निगम एक अधिकारी से गुस्से में सीधा सवाल कर दिया “आप मेरा फोन क्यों नहीं उठाते हो”। ऐसे ना जाने कितने ही लोग या पत्रकार अधिकारियों द्वारा फोन ना उठाए जाने की आदत से परेशान हैं।
सरकार के निर्देशों का सीधा उल्लंघन
गौरतलब है कि सरकार ने अधिकारियों को सीधे निर्देश दिए हुए हैं कि सीयूजी और आधिकारिक फोन नंबर पर आने वाली कॉल को प्राथमिकता दी जाए। किसी कारणवश अधिकारी कॉल रिसीव न कर सकें तो, 10 मिनट के अंदर कॉल बैक करने के भी निर्देश सरकार द्वारा दिए गए हैं। अगर कोई अधिकारी निर्देशों का उल्लंघन करता है या फिर जानबूझकर फोन नहीं उठाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद सरकार के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है।
पत्रकार आखिर किससे लें आधिकारिक वर्जन
जब किसी भी क्षेत्र में आमजन से जुड़ी कोई समस्या सामने आती है तो पत्रकार का फर्ज बनता है कि उसे प्राथमिकता से उठाए। इसके लिए जरूरी है कि खबर लिखने से पहले उक्त समस्या से संबंधित अधिकारी का वर्जन लिया जाए। यहां सवाल है कि जब संबंधित अधिकारियों को पत्रकारों द्वारा फोन किया जाता है तो उनकी ओर से कोई रिस्पांस ही नहीं दिया जाता। ऐसे में पत्रकारों को उस समस्या को प्रकाशित करने में दिक्कत पेश आती है।
एनके चौधरी जैसे अधिकारियों से शिक्षा लेने की जरूरत
एक तरफ जहां जीडीए या नगर निगम के अधिकारी लोगों के फोन उठाना जरूरी नहीं समझते वहीं, एनके चौधरी जोकि नगर निगम में मुख्य अभियंता के तौर पर जरूरत है, जैसे अधिकारी एक बार में फोन उठा लेते हैं। इतना ही नहीं अगर इसी कारणवश में फोन नहीं उठा पाए तो, एक निश्चित समय में कॉल बैक कर लेते हैं। एनके चौधरी न केवल समस्याओं को गौरपूर्वक सुनते हैं, बल्कि प्राथमिकता के तौर पर उसे समस्या का समाधान भी कर देते हैं। जाहिर तौर पर नगर निगम और जीडीए के वह अधिकारी जो लोगों के फोन उठाना जरूरी नहीं समझते, उन्हें एनके चौधरी से सबक लेने की जरूरत है।



