सादगी का प्रतीक, अवाम का हमदर्द अब नहीं रहा : ताहिर हुसैन
निज़ामाबाद के विधायक आलमबदी साहब के इंतेक़ाल से प्रदेश की सियासत और जनता में शोक की लहर
गाजियाबाद (आप अभीतक)। आज़मगढ़ की निज़ामाबाद विधानसभा सीट से कई बार विधायक रहे जनाब आलमबदी साहब के इंतेक़ाल की ख़बर ने पूरे प्रदेश को गहरे ग़म में डुबो दिया है। उनका निधन सिर्फ़ एक जनप्रतिनिधि का नहीं, बल्कि सादगी, ईमानदारी और जनसेवा की मिसाल मानी जाने वाली एक शख़्सियत का बिछड़ जाना है।
आलमबदी साहब ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में जनता का भरोसा कई बार जीता। वह पहली बार वर्ष 1996 में निज़ामाबाद से विधायक चुने गए। इसके बाद 2002, 2012, 2017 और 2022 में भी जनता ने उन्हें अपना प्रतिनिधि बनाकर विधानसभा भेजा। वर्षों तक राजनीति में सक्रिय रहने के बावजूद उन्होंने कभी सादगी का दामन नहीं छोड़ा। आलीशान बंगले और लग्ज़री गाड़ियों की जगह उन्होंने एक साधारण टीन शेड के मकान में रहकर यह साबित किया कि जनसेवा का रिश्ता दिखावे से नहीं, बल्कि नीयत और कर्म से होता है।
उनके इंतेक़ाल पर समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव एवं गाज़ियाबाद के चुनाव प्रभारी ताहिर हुसैन ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि ‘ज़रा सोचकर देखिए, क्या आज के दौर में कोई और विधायक ऐसी सादगी में दिखाई देता है? मरहूम आलमबदी साहब की सादगी, ईमानदारी और जनता के लिए किए गए कार्य इतिहास के पन्नों में हमेशा दर्ज रहेंगे।’
मरहूम आलमबदी साहब अपनी ख़ुलूस भरी शख़्सियत, बेदाग़ सार्वजनिक जीवन और अवाम के प्रति समर्पण के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के जनप्रतिनिधियों के लिए एक मिसाल रहेगा कि राजनीति का असली मक़सद सत्ता नहीं, बल्कि समाज और जनता की ख़िदमत है।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए और उनके अहल-ए-ख़ाना, चाहने वालों और तमाम लवाहिक़ीन को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।




