हाउस अरेस्ट होने पर सरकार को घेरा
पेपर लीक पर जवाब दो, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो: सलमान मंसूरी
गाजियाबाद। एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष सलमान मंसूरी को जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में शामिल होने जाने से पहले ही पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया। इस मौके पर उन्होंने सरकार सवाल किया कि देश में यह सोचने का विषय है कि आखिर सरकार छात्रों की आवाज से इतनी भयभीत क्यों है कि एक छात्र को पुलिस के माध्यम से हाउस अरेस्ट कर दिया जाता है। लोकतंत्र में अपनी बात रखना और अपने अधिकारों की मांग करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन जब भी छात्र शिक्षा, न्याय और अपने भविष्य की बात करते हैं, तब उनकी मांगों का जवाब देने के बजाय पुलिस प्रशासन को आगे कर दिया जाता है। यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है। सलमान मंसूरी ने कहा कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने से रोकना यह दशार्ता है कि सरकार छात्रों की आवाज सुनने के बजाय उसे दबाने का प्रयास कर रही है। लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना कोई अपराध नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि बार-बार पेपर लीक जैसी घटनाएं होती हैं तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई होना आवश्यक है ताकि छात्रों का विश्वास बना रहे। उन्होंने कहा कि अब समय चुप बैठने का नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने का है, ताकि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित हो सके। उन्होंने सभी छात्रों और युवाओं से अपील की कि वे एकजुट होकर शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्ष परीक्षाओं और छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहें। जिला उपाध्यक्ष कादर ने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के लिए पुलिस का सहारा लेना लोकतंत्र की भावना के विपरीत है। सलमान मंसूरी ने कहा है कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं आएगी, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई नहीं होगी और छात्रों की मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक हमारा लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।




