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जीडीए के अधिकारी क्यों दे रहे अवैध निर्माण को ढील

वहां कैसे चल रहा काम, जहां लगी हुई है सरकारी सील?

गाजियाबाद। नियम कानून को ताक पर रखकर जिले में अवैध निर्माणों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कहीं अवैध कॉलोनियां काटी जा रही है, तो कहीं अवैध निर्माण करके उसका व्यवसायीकरण किया जा रहा है। अवैध निर्माण के इस खेल से अब शिक्षा का क्षेत्र अछूता नहीं रह गया है। जिले में मान्यताओं के खिलाफ निर्माण धड़ल्ले से स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। ऐसा ही आरोप नंदग्राम स्थित एक प्राइवेट स्कूल पर भी लग रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक नंदग्राम के थाना रोड पर संचालित हो रहे किड्स किंगडम नामक स्कूल में जहां नियम कानूनों की खुलकर धज्जियां उड़ाई जा रही है, वहीं नन्हे बच्चों की जान के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है। बताया जाता है कि यह स्कूल अवैध रूप से बने एक फ्लैट में संचालित किया जा रहा है जिस पर जीडीए पहले सीलिंग की कार्रवाई कर चुका है। आरोप है कि अवैध होने के बावजूद स्कूल में पढ़ाई जारी है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसकी शह पर अवैध निर्माण के अंदर चल रहा शिक्षा का व्यवसायिकरण किया जा रहा है। स्कूल संचालकों के हौसले आखिर इतने बुलंद किस आधार पर हो रहे हैं कि वे सरकारी सील लगे होने के बावजूद फ्लैट में स्कूल संचालित करते हैं। यह मामला सीधे तौर पर जीडीए के अधिकारियों पर सवाल खड़े कर रहा है। खुलेआम नियम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही है और जीडीए आंखें मूंदे बैठा है।

जीडीए ने दिया 2 महीने का समय: प्रधानाचार्या

जब इस बारे में स्कूल की प्रिंसिपल से बात की गई तो उन्होंने बताया, जीडीए ने फिलहाल सील खुलवा दी है और दो महीने का लिखित समय दिया गया है। अगर प्रिंसिपल का कथन सही है तो, सवाल उठता है कि अगर इन दो महीनों में उक्त स्कूल में बच्चों के साथ कोई हादसा हो जाता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। जीडीए अधिकारियों को इस बात का भी जवाब देना चाहिए।

शिक्षा विभाग भी बेखबर

जानकारी के मुताबिक जिस स्कूल का ऊपर जिक्र किया गया है उसे बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से पांचवी तक मान्यता प्राप्त है। क्या जीडीए की उत्तर शिक्षा विभाग को भी इसकी खबर नहीं की जिस स्कूल को मान्यता दी गई है, वह सरकारी मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है। आखिर क्यों शिक्षा विभाग की ओर से इस स्कूल की मान्यता को रद्द नहीं किया गया। सरकारी तंत्र इसके लिए सीधे तौर पर जवाबदेह है।

क्या सिर्फ दिखावे के लिए है जीडीए का प्रवर्तन विभाग

गाजियाबाद। जीडीए द्वारा जब भी कहीं अवैध निर्माण पर ध्वस्तीकरण या सीलिंग की कार्रवाई की जाती है तो अधिकारी खूब जोर शोर से अपनी पीठ थपथपाते हैं। हालांकि, कई मामलों में कार्रवाई के बाद उस जगह फिर से निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाता है। जीडीए द्वारा लगाई गई सील भी बस कुछ ही दिन तक प्रभावित रहती है। उक्त स्कूल के अलावा चंद्रपुरी में एक भवन में सील लगने के कुछ ही दिनों बाद वहां निर्माण कार्य फिर से शुरू कर दिया गया है। ऐसे ही ना जाने कितने ही मामलों को गाजियाबाद में भरमार है। ये मामले सीधे तौर पर जीडीए की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करते हैं कि क्या प्रवर्तन दल महज दिखावे के लिए बनाया गया था। आखिर एक बार कार्रवाई होने के बाद वहां से प्रवर्तन दल और जीडीए अधिकारियों द्वारा आंखें क्यों मूंद ली जाती हैं। जब इन मामलों पर वर्जन लेने के लिए जेई या अन्य कनिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की जाती है तो वह फोन रिसीव करने की सहमत तक नहीं उठाते। हालांकि, आला अधिकारी लंबा इंतजार करवाने के बाद मुलाकात कर लेते हैं, लेकिन जेई आदि तो फोन उठाना तक जरूरी नहीं समझते।

क्या जीडीए बन गया है भ्रष्टाचार का गढ़

जिस तरह जिले में अवैध निर्माण की भरमार देखी जा सकती है उससे सीधे तौर पर जीडीए की कार्यशैली और नीयत पर सवाल उठाते हैं। सूत्रों के मुताबिक जीडीए के अधिकारी और बाबुओं ने कुछ चुनिंदा नेताओं और पत्रकारों को इस खेल में साथ लिया हुआ है। आरोप यह भी है कि इन्हींअवैध निर्माण के चलते जीडीए में लंबे समय से जमे हुए बाबुओं ने भी करोड़ों की संपत्ति जमा कर ली है। अगर उनकी सत्यता और पारदर्शी के साथ जांच की जाए तो पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी।

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