uttar pradeshमुज़फ्फ़रनगर

क्रांतिकारी शालू सैनी की इंसानियत को सलाम,

लावारिस व बेसहारा मृतकों को दे रही है अपना नाम, सम्मान के साथ अपने हाथों से देती है अंतिम विदाई

मुजफ्फरनगर। समाज में अक्सर ऐसे लोग भी मिल जाते हैं जो अपनों के बिछड़ जाने पर भी साथ नहीं निभाते, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अनजान और लावारिस लोगों को भी अपना मानकर उनकी अंतिम यात्रा को सम्मानजनक बना देते हैं। ऐसा ही मानवीय उदाहरण बनी है क्रांतिकारी शालू सैनी
6000 से अधिक मृतकों के अंतिम संस्कार व अस्थि विसर्जन करने वाली क्रांतिकारी शालू सैनी खामोशी से अंतिम संस्कार की सेवा में जुटी है ऐसा लगता है जैसे उन्होंने अपना जीवन भगवान को समर्पित कर दिया है
पुरकाजी थाना और ककरौली थाना पुलिस से मिली सूचना के बाद दो लावारिस शवों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी क्रांतिकारी शालू सैनी ने अपने हाथों में ली। दोनों मृतकों को अपना नाम देकर पूरे सम्मान और विधि-विधान के साथ मोक्षधाम तक पहुंचाया । अंतिम संस्कार की सभी व्यवस्थाएं स्वयं कर यह संदेश दिया कि इंसानियत का रिश्ता किसी पहचान या खून के रिश्ते का मोहताज नहीं होता।
क्रांतिकारी शालू सैनी ने कहा कि दुनिया से विदा होने के बाद हर इंसान सम्मान का हकदार है। यदि किसी का अपना नहीं है तो मुझसे संपर्क करे 8273189764 महादेव की कृपा से मैं आगे आकर उसका सहारा बनूँगी यही सच्ची मानव सेवा और सबसे बड़ा धर्म है।
इस मानवीय पहल को देखकर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। हर किसी ने इस सेवा भाव की सराहना करते हुए कहा कि जिन लोगों को जीवनभर कोई अपना नहीं मिला, उन्हें अंतिम विदाई के समय अपना कहने वाला मिल गया। यह कार्य केवल एक अंतिम संस्कार नहीं, बल्कि मानवता के प्रति सच्ची संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण है।
क्रांतिकारी शालू सैनी वर्षों से लावारिस एवं असहाय लोगों के अंतिम संस्कार का दायित्व निभाते आ रही हैं। उनका यह सेवा अभियान लगातार समाज में मानवता, करुणा और संवेदनशीलता की मिसाल कायम कर रहा है।क्रांतिकारी शालू सैनी ने जनता से अपील भी की है कि जिसका सामर्थ्य हो वो लकड़ी घी कफन सामग्री एम्बुलेंस गाड़ी में इच्छा अनुसार योगदान कर पुण्य के भागी बने 8273189764फोन पे अपनी नेक कमाई का छोटा सा हिस्सा अंतिम बिदाई की सेवा में जरूर लगाए

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