कलेक्ट्रेट पर आजाद समाज पार्टी का हल्ला बोल
आरक्षण के मुद्दे पर राज्य व केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर की नारेबाजी
गाजियाबाद। आजाद समाजपार्टी द्वारा नई दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रस्तावित भागीदारी महाआंदोलन को अनुमति न मिलने के कारण पार्टी ने 600 से ज्यादा जिलों में कलेक्ट्रेट पर गुरुवार को व्यापक धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान 24 सूत्री ज्ञापन भी जिलाधिकारी को राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया। गाजियाबाद में भी आजाद समाज पार्टी ने कलेक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन कर आरक्षण संबंधी मांगों को पूरे जोर-जोर से उठाया। इस दौरान आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और भीम आर्मी का भारी आक्रोश देखने को मिला। कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पार्टी का कहना है कि दिल्ली में होने वाला यह महाआंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण और संवैधानिक था, जिसमें देशभर से दलित, पिछड़े, आदिवासी और अल्पसंख्यक समाज के लोग अपने बुनियादी हक मांगने आ रहे थे, लेकिन प्रशासन को ढाल बनाकर आंदोलन की अनुमति रद्द कर दी गई, जो सीधे तौर पर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। कार्यकर्ताओं का साफ आरोप है कि सरकार जनहित और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है और विपक्ष की आवाज को दबाने का हर संभव प्रयास कर रही है। पार्टी की मांग है कि देश के चार प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में एससी और एसटी वर्ग के लिए लागू 70 प्रतिशत आरक्षण को खत्म करने का जो प्रयास किया जा रहा है, उसे तुरंत रोका जाए और पुराना कोटा बहाल रखा जाए। इसके अलावा, देश की अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की विशाल आबादी को उनकी संख्या के अनुपात में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में आरक्षण दिया जाए ताकि राजनीतिक फैसलों में उनकी बराबरी की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। साथ ही, राजनीति में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने के सरकारी दावों पर भी स्थिति साफ की जाए कि इसमें एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से कितना कोटा आरक्षित रखा जाएगा।
मांगे नहीं मानी तो होगा राष्ट्रव्यापी आंदोलन
करीब दो घंटे तक चले इस जोरदार विरोध-प्रदर्शन और नारेबाजी के बाद कार्यकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचें। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ को राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। पार्टी का कहना है कि अगर सरकार ने उनकी जायज मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया और दमनकारी नीतियां बंद नहीं कीं, तो आने वाले दिनों में आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी मिलकर विधानसभा का घेराव करेगी और इसके बाद दिल्ली कूच कर बड़ा राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगी।
600 से ज्यादा जिलों पर हुआ प्रदर्शन
पिछले दिनों आरक्षण को खत्म करने के लिए जंतर मंतर पर एक प्रदर्शन किया गया। इस पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रदर्शन कार्यों को आश्वासन भी दिया। इससे दलितों पिछड़ों और मुसलमान में यह मैसेज गया कि आरक्षण खत्म किया जाएगा। कॉलेजों में रैगिंग को खत्म करने, जातिगत टिप्पणी करने और मॉब लिंचिंग को खत्म करने के लिए एक कानून लाया गया था। अब इस कानून को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। इसके खिलाफ सिर्फ सांसद चंद्रशेखर आजाद ने संज्ञान लिया। इसी संबंध में नई दिल्ली के जंतर मंतर पर महा आंदोलन किया जाना था जिसमें करीब 10 लाख लोगों के जुड़ने की संभावना थी, लेकिन सरकार और पुलिस प्रशासन की ओर देश की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद फैसला लिया गया कि देश के 600 से ज्यादा जिलों में धरना प्रदर्शन किया जायेगा।
एसआईआर में हुई बड़ी धांधली
चंद्रशेखर आजाद दलितों पिछड़ों और मुसलमानों की मजबूत आवाज हैं। आजाद समाज पार्टी आरक्षण पर आवास नहीं आने देंगे। भास्कर उत्तर प्रदेश में मस्जिद मदरसों को टारगेट किया जा रहा है। इस पर कोई नेता बोलने को तैयार नहीं है। यही कारण है कि मुसलमान बड़ी संख्या में आजाद समाज पार्टी के साथ जुड़ रहा है। 2027 में इसके परिणाम देखने को मिलेंगे। मुसलमान का सबसे ज्यादा नुकसान समाजवादी पार्टी ने किया है। अब मुसलमान को चंद्रशेखर आजाद के रूप में एक बेहतर नेता मिल चुका है। मौजूदा चुनाव आयोग को ना कुछ सुनाई दे रहा है और ना ही कुछ दिखाई दे रहा है। एसआईआर में करोड़ों वोट काट दिए गए। यह एक बड़ी धांधली है जिसे चंद्रशेखर आजाद भी समय-समय पर उठाते रहे हैं।
दिल्ली में 19 संसारी ने संभाली कमान
600 से ज्यादा दिलों में हुए इस प्रदर्शन की कमान जहां लखनऊ में चंद्रशेखर ने खुद संभाली तो वहीं, दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता यूसुफ़ अंसारी मोर्चा संभाले रहे। उनके नेतृत्व में उपराज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया।




