अब ड्रोन और सैटेलाइट से पकड़े जाएंगे अवैध निर्माण, एआई करेगा नक्शे से मिलान
बीडीए विकसित करेगा जीआईएस-एआई आधारित निगरानी प्रणाली, गड़बड़ी मिलते ही स्थल होगा रेड फ्लैग
बरेली। शहर में बढ़ते अवैध निर्माण पर शिकंजा कसने के लिए बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। प्राधिकरण जीआईएस और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित ऐसी निगरानी प्रणाली विकसित करेगा, जिसके माध्यम से ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी से निर्माण गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।
नई व्यवस्था में स्वीकृत मानचित्र और वास्तविक निर्माण स्थल का डिजिटल मिलान किया जाएगा। प्रत्येक स्वीकृत नक्शे और निर्माण स्थल की जियो टैगिंग के साथ भवन का थ्रीडी मॉडल तैयार किया जाएगा। इसके बाद ड्रोन व सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों और आंकड़ों का एआई सॉफ्टवेयर स्वीकृत नक्शे और थ्रीडी मॉडल से स्वतः मिलान करेगा।
निर्माण में स्वीकृत नक्शे से किसी तरह का विचलन पाए जाने पर संबंधित स्थल को सॉफ्टवेयर में ‘रेड फ्लैग’ किया जाएगा। इसकी सूचना संबंधित जोन के प्रभारी अधिकारी को मिलेगी। इसके बाद अधिकारी मौके पर स्थलीय सत्यापन कर नियमानुसार कार्रवाई कर सकेंगे।
पहले एक जोन में होगा प्रयोग
फिलहाल इस व्यवस्था को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बीडीए के एक जोन में लागू किया जाएगा। प्रयोग सफल रहा तो इसे प्रदेश के अन्य विकास प्राधिकरणों में भी लागू किए जाने की संभावना है।
शनिवार को तकनीकी टीम ने बीडीए अधिकारियों के सामने प्रस्तावित प्रणाली का प्रस्तुतीकरण किया। बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडेय ने सॉफ्टवेयर विकास का काम जल्द शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से अवैध निर्माण की पहचान और निगरानी अधिक त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी बनाई जा सकेगी।




