भाजपा में गुटबाजी और अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं, पूरनलाल लोधी के सख्त तेवर
बरेली। धोपेश्वरनाथ मंदिर के बाहर गोल चौराहे के पास भाजपा के दो वरिष्ठ नेताओं के बीच कथित नोकझोंक और हाथापाई की चर्चा के बीच ब्रज क्षेत्र अध्यक्ष पूरनलाल लोधी की सोशल मीडिया पोस्ट ने संगठन के भीतर हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने साफ संदेश दिया है कि ब्रज क्षेत्र में अनुशासनहीनता के लिए कोई जगह नहीं है और विवाद को बढ़ावा देने वालों के साथ सोशल मीडिया पर ऐसी गतिविधियों को समर्थन देने वालों पर भी नजर रखी जाएगी।
अनुशासनहीनता पर सख्त संदेश
पूरनलाल लोधी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि “ब्रज क्षेत्र में अनुशासनहीनता का स्थान शून्य है।” उन्होंने कहा कि तिल का ताड़ बनाने वालों की पहचान के लिए तह तक जाएंगे। साथ ही विवादित पोस्ट पर लाइक, शेयर और कमेंट करने वालों का भी संज्ञान लेने की बात कही।
उनके इस संदेश को भाजपा के भीतर चल रही कथित गुटबाजी और नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से सामने आ रहे मतभेदों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि क्षेत्रीय अध्यक्ष ने किसी व्यक्ति या घटना का नाम नहीं लिया है।
धोपेश्वरनाथ की घटना के बाद बढ़ी चर्चा
पिछले दिनों धोपेश्वरनाथ मंदिर के बाहर गोल चौराहे के पास भाजपा के दो वरिष्ठ नेताओं के बीच कथित तौर पर तीखी नोकझोंक हुई थी। मामला गाली-गलौज और हाथापाई तक पहुंचने की चर्चा रही। मौके पर पार्टी के कई पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि भी मौजूद बताए गए।
इसी घटनाक्रम के बाद क्षेत्रीय अध्यक्ष की अनुशासन को लेकर की गई पोस्ट ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया। हालांकि पोस्ट को घटना से जोड़कर पूछे जाने पर पूरनलाल लोधी ने किसी खास प्रकरण की पुष्टि नहीं की। उन्होंने शायराना अंदाज में कहा कि “यह तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना।”
सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी नजर
क्षेत्रीय अध्यक्ष के संदेश में सोशल मीडिया को लेकर भी खास तौर पर सख्ती दिखाई गई है। पार्टी के अंदरूनी विवादों को सार्वजनिक करने, खेमेबंदी को बढ़ावा देने या विवादित पोस्टों को लाइक, शेयर और कमेंट के जरिए समर्थन देने वालों पर संगठन की नजर रहने के संकेत दिए गए हैं।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए संगठन के भीतर एकजुटता अहम मानी जा रही है। ऐसे में नेताओं के बीच सार्वजनिक टकराव और गुटबाजी पार्टी की अनुशासित संगठन वाली छवि के लिए चुनौती बन सकती है। पूरनलाल लोधी के सख्त संदेश को इसी पृष्ठभूमि में संगठन के भीतर अनुशासन की लकीर खींचने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
अब सवाल यह है कि क्षेत्रीय अध्यक्ष की यह चेतावनी केवल सोशल मीडिया संदेश तक सीमित रहती है या आने वाले दिनों में संगठन के स्तर पर भी इसका असर दिखाई देता है।




