Ghaziabaduttar pradesh

कांग्रेस में संगठनात्मक ‘सर्जरी’ की तैयारी!

संगठन सृजन अभियान में प्रभारी-ऑब्जर्वर करेंगे जमीनी पड़ताल, आलाकमान तक पहुंचेगी जिलेवार रिपोर्ट

गाजियाबाद। आप अभीतक, ( लायकहुसैन ) कांग्रेस ने आगामी चुनावी चुनौतियों से पहले अपने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। संगठन सृजन अभियान के तहत पार्टी ने प्रभारी और ऑब्जर्वर नियुक्त कर जिलों के संगठन की वास्तविक स्थिति परखने की जिम्मेदारी सौंपी है। इस अभियान को कांग्रेस के भीतर संभावित संगठनात्मक बदलावों की जमीन तैयार करने वाली अहम कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। अभियान के तहत पूर्व मंत्री सतीश शर्मा को गौतमबुद्धनगर का प्रभारी बनाया गया है, जबकि नरेंद्र चौहान को हापुड़ जिले का प्रभारी नियुक्त किया गया है। वहीं राष्ट्रीय ऑब्जर्वर अशोक तंवर और सह प्रभारी अफरोज अली खांन, हेमंत प्रधान को गाजियाबाद का ऑब्जर्वर तथा शेख मस्तान वली और ज्ञानेंद्र राघव, विनीत त्यागी को गौतमबुद्धनगर का ऑब्जर्वर बनाया गया है।

अब कागज नहीं, जमीन बताएगी संगठन की ताकत

संगठन सृजन अभियान में प्रभारी और ऑब्जर्वर जिलों में रहकर संगठन की जमीनी स्थिति का आकलन करेंगे। बूथ स्तर पर पार्टी की सक्रियता, कार्यकर्ताओं की भागीदारी, पदाधिकारियों की भूमिका, संगठन के विस्तार और पार्टी कार्यक्रमों की प्रभावशीलता जैसे पहलुओं पर फीडबैक लिया जाएगा। इस प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि संगठन की स्थिति की रिपोर्ट सीधे कांग्रेस आलाकमान तक पहुंचाई जाएगी। इससे नेतृत्व को स्थानीय दावों से अलग जमीनी स्तर की वास्तविक स्थिति समझने का अवसर मिलेगा।

कमजोर जिलों में बदल सकता है संगठन का चेहरा

अभियान के दौरान यदि किसी जिले में संगठन अपेक्षित रूप से मजबूत नहीं पाया जाता है या पदाधिकारियों की सक्रियता पर सवाल सामने आते हैं, तो वहां संगठनात्मक स्तर पर बदलाव की संभावना बन सकती है। यानी अब केवल पद संभालना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पदाधिकारी का प्रदर्शन और संगठन को मजबूत करने की क्षमता भी कसौटी पर होगी। यही रिपोर्ट भविष्य में जिम्मेदारियों के पुनर्गठन का आधार बन सकती है।

प्रभारी और ऑब्जर्वर की रिपोर्ट अहम मानी जाएगी

प्रभारी और ऑब्जर्वर दोनों जमीनी तथ्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे। दोनों स्तरों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर कांग्रेस नेतृत्व जिलेवार संगठन की स्थिति का आकलन कर सकेगा।
खास बात यह है कि प्रभारी संगठन के साथ रहकर अभियान को आगे बढ़ाएंगे, जबकि ऑब्जर्वर संगठन की स्थिति का स्वतंत्र आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ऐसे में दोनों रिपोर्टों का आपसी मिलान संगठन की वास्तविक तस्वीर सामने लाने में अहम साबित हो सकता है।

यही बन सकता है कांग्रेस की जीत का मंत्र

राजनीतिक दृष्टि से संगठन सृजन अभियान कांग्रेस के लिए केवल संगठन विस्तार का कार्यक्रम नहीं, बल्कि 2027 की चुनावी तैयारियों से पहले संगठन की ताकत और कमजोरियों को पहचानने का अवसर भी है। यदि अभियान के जरिए निष्क्रिय ढांचे को सक्रिय किया जाता है, जमीनी कार्यकर्ताओं को उचित जिम्मेदारी मिलती है और कमजोर क्षेत्रों में समय रहते सुधार किया जाता है, तो कांग्रेस की चुनावी तैयारियों को नई धार मिल सकती है।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि प्रभारी और ऑब्जर्वर की रिपोर्ट में कौन-सा जिला मजबूत निकलता है, कहां संगठन को सुधार की जरूरत बताई जाती है और किन चेहरों पर कांग्रेस नेतृत्व भरोसा जताता है।
साफ है—संगठन सृजन अभियान के बाद कांग्रेस में सिर्फ संगठन नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों का भी नया ‘रिपोर्ट कार्ड’ तैयार होने वाला है।

Related Articles

Back to top button