सरताजे आगरा हज़रत सैयदना अमीर अबुलउला
अकबराबादी (रह.) का उर्स अकीदत के साथ मनाया गया
बरेली। चेहल्लुम की 15वीं तारीख को हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बरेली में सरताजे आगरा हज़रत सैयदना अमीर अबुलउला अकबराबादी (रह.) का उर्स अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। महफिल सैयद हयात अहमद (अरमान मियां) की जेरे सरपरस्ती में आयोजित हुई, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की।
महफिल में नात, तकरीर और दुआ का सिलसिला चला। उलमा-ए-किराम ने बुजुर्गाने दीन की तालीमात, इंसानियत, मोहब्बत, भाईचारे और अमन के पैगाम पर रोशनी डालते हुए कहा कि औलिया-ए-किराम ने हमेशा समाज को आपसी सौहार्द और इंसानियत की राह दिखाई, जिनकी शिक्षाएं आज भी लोगों के लिए मार्गदर्शक हैं।
महफिल के सरपरस्त सैयद हयात अहमद (अरमान मियां) ने कहा, “औलिया-ए-किराम का उर्स हमें उनकी तालीमात को याद करने और अपनी ज़िंदगी में अपनाने का मौका देता है। हमें नफ़रत और तफ़रके से दूर रहकर मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत के पैगाम को घर-घर तक पहुंचाना चाहिए। यही बुजुर्गाने दीन की असली तालीम और उनकी याद मनाने का मकसद है।”
डॉ. शहज़ेब हसन ने अपने बयान में कहा, “हज़रत सैयदना अमीर अबुलउला अकबराबादी (रह.) की ज़िंदगी इंसानियत, मोहब्बत और इख़लास का बेहतरीन नमूना है। हमें उनके बताए हुए रास्ते पर चलते हुए समाज में अमन, भाईचारा और इंसानियत का पैगाम आम करना चाहिए। औलिया-ए-किराम का संदेश पूरी इंसानियत के लिए है और यही उनकी सबसे बड़ी तालीम है।”
कार्यक्रम के अंत में देश की खुशहाली, अमन-चैन और कौमी एकता के लिए विशेष दुआ कराई गई तथा उपस्थित लोगों ने उर्स की मुबारकबाद पेश की।



