‘छोटे लोहिया’ जनेश्वर मिश्र की जयंती 5 अगस्त को
लखनऊ लोहिया पार्क में समाजवादी विचारों को किया जाएगा नमन
सादगी, ईमानदारी और सिद्धांतों की राजनीति के प्रतीक रहे जनेश्वर मिश्र को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे समाजवादी; नाती कुलभूषण तिवारी बोले— उनके आदर्शों पर हमेशा चलता रहेगा परिवार

गाजियाबाद (लायक हुसैन)। समाजवादी आंदोलन के प्रखर नेता, ‘छोटे लोहिया’ के नाम से विख्यात जनेश्वर मिश्र की जयंती 5 अगस्त को लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया पार्क में श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में समर्थक उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके विचारों और संघर्षों को याद करेंगे।
भारतीय राजनीति में जनेश्वर मिश्र का व्यक्तित्व सिद्धांतों पर आधारित राजनीति की मिसाल माना जाता है। समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसी कारण उन्हें प्रेम और सम्मान से ‘छोटे लोहिया’ कहा गया। उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में सादगी, ईमानदारी, वैचारिक प्रतिबद्धता और जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। कई बार सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री रहने के बावजूद जनेश्वर मिश्र ने कभी सत्ता का अहंकार नहीं दिखाया। उनका जीवन आम कार्यकर्ता की तरह सरल और अनुशासित रहा। राजनीतिक पद उनके लिए प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि जनता की सेवा का माध्यम था। यही वजह है कि आज भी उनका नाम समाजवादी राजनीति में सम्मान के साथ लिया जाता है।
समाजवादी आंदोलन के पुरोधा मुलायम सिंह यादव उन्हें अपना सबसे विश्वसनीय सहयोगी और मार्गदर्शक मानते थे। वहीं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी समय-समय पर उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें समाजवादी आंदोलन की अमूल्य धरोहर बताते रहे हैं।
जनेश्वर मिश्र के नाती कुलभूषण तिवारी ने दैनिक आप अभीतक के समाचार संपादक लायक हुसैन से बातचीत में कहा कि नाना जी केवल परिवार के अभिभावक नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा थे। उन्होंने कहा, ‘नाना जी के आदर्श, उनकी सादगी, ईमानदारी और समाजवादी विचारधारा हमारे परिवार की सबसे बड़ी विरासत हैं। हम आज भी उनके पदचिह्नों पर चल रहे हैं और आगे भी उनके बताए रास्ते पर चलते रहेंगे।’
उन्होंने बताया कि 5 अगस्त को लोहिया पार्क में आयोजित जयंती समारोह में समाजवादी विचारधारा से जुड़े लोग एकत्र होकर जनेश्वर मिश्र के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को नमन करेंगे। यह आयोजन केवल उनकी जयंती का कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाजवादी मूल्यों, राजनीतिक शुचिता और जनसेवा के संकल्प को दोहराने का अवसर भी होगा।



