बारिश ने खोली स्मार्ट सिटी और ड्रेनेज सिस्टम की पोल
बरेली के कई इलाके बने तालाब
बरेली। रविवार से शुरू हुई रुक-रुककर तेज बारिश ने बरेली शहर की जल निकासी व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी। शहर के पॉश इलाकों से लेकर घनी आबादी वाले मोहल्लों तक सड़कों पर घंटों पानी भरा रहा। संजय नगर, हजियापुर, स्टेडियम रोड, राजेंद्रनगर, मॉडल टाउन, सिविल लाइंस, सुभाषनगर, आला हजरत मोड़, सौदागरान, बमनपुरी, मलूकपुर और डेलापीर-डीडीपुरम मार्ग समेत कई क्षेत्रों में सड़कें तालाब जैसी नजर आईं। जलभराव के कारण लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
कई स्थानों पर घुटनों तक पानी भर जाने से वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जलभराव के चलते बरसाती पानी कई घरों और दुकानों में घुस गया, जिससे लोगों के सामान को नुकसान पहुंचा। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर निगम हर वर्ष नालों की सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करता है, लेकिन पहली ही तेज बारिश में पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो जाती है।
लोगों का कहना है कि सीवर लाइनें चोक होने और नालों की समुचित सफाई न होने के कारण बारिश का पानी निकल नहीं सका। उन्होंने सवाल उठाया कि मानसून से पहले किए गए तैयारियों के दावे आखिर जमीनी स्तर पर क्यों दिखाई नहीं देते।
टक्कर की पुलिया बनी बड़ी समस्या
मलूकपुर, जसौली, दरगाह आला हजरत मोड़, सौदागरान और बमनपुरी समेत कई इलाकों की जल निकासी टक्कर की पुलिया पर निर्भर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिया संकरी होने के कारण बारिश का पानी आगे नहीं बढ़ पाता और बैकफ्लो होने से आसपास के मोहल्लों में जलभराव हो जाता है।
बारिश में बह गया पैचवर्क
बारिश ने हाल ही में हुए सड़क मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े कर दिए। कई स्थानों पर गड्ढे भरने के लिए किया गया पैचवर्क पहली ही बारिश में उखड़ गया। डामर और सीमेंट बह जाने से सड़कें दोबारा गड्ढों में तब्दील हो गईं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम और संबंधित विभागों से जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने, नालों की प्रभावी सफाई कराने तथा क्षतिग्रस्त सड़कों की गुणवत्तापूर्ण मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि आगामी बारिश में लोगों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।




