सपा का गठबंधन मतलब स्वार्थ की राजनीति’
मायावती का अखिलेश पर तीखा प्रहार
रालोद-जाट समाज से माफी की मांग, PDA और सपा सरकारों के कार्यकाल पर भी उठाए सवाल
लखनऊ/ लायक हुसैन (आप अभीतक)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जोरदार राजनीतिक हमला बोला है। रालोद नेता को लेकर अखिलेश यादव के कथित बयान पर आपत्ति जताते हुए मायावती ने इसे अमर्यादित और अहंकारपूर्ण बताया। उन्होंने सपा प्रमुख से रालोद, उसके नेता तथा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार के प्रति टिप्पणी को लेकर जाट समाज से भी माफी मांगने की मांग की। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी सिलसिलेवार पोस्ट में सपा की गठबंधन राजनीति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा का इतिहास अपने सहयोगी दलों के साथ राजनीतिक संकीर्णता और स्वार्थपूर्ण रवैये का रहा है। मायावती के मुताबिक, सपा के इसी रवैये का लाभ कई बार भाजपा को मिला और धर्मनिरपेक्ष ताकतें कमजोर हुईं।
गेस्ट हाउस कांड से पुराने गठबंधन तक का जिक्र
बसपा प्रमुख ने सपा-बसपा के पुराने राजनीतिक रिश्तों को याद करते हुए 1993 में बने गठबंधन और उसके बाद हुए लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सपा के साथ गठबंधन का अनुभव बसपा के लिए बेहद कटु रहा है।
मायावती ने आगे अखिलेश यादव के नेतृत्व में हुए सपा-बसपा लोकसभा चुनावी गठबंधन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं आने के बाद यह गठबंधन भी ज्यादा समय तक नहीं चल सका। उनका आरोप है कि इसके पीछे सपा का बसपा के प्रति अहंकारी और स्वार्थपूर्ण रवैया प्रमुख कारण रहा।
‘गठबंधन में काम निकालती है सपा’
मायावती ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पार्टी गठबंधन के जरिए अपना राजनीतिक हित साधने के बाद सहयोगी दलों से दूरी बनाने लगती है। उन्होंने सपा की तुलना गिरगिट से करते हुए आरोप लगाया कि जरूरत के मुताबिक उसका राजनीतिक रंग बदलता रहता है और बाद में सहयोगियों के खिलाफ ही तीखी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है।
उन्होंने सर्वसमाज के लोगों से सपा की कथित संकीर्ण और जातिवादी राजनीति से सतर्क रहने की अपील की।
PDA की राजनीति पर भी सवाल
मायावती ने अखिलेश यादव के PDA नारे को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक परिस्थिति के अनुसार PDA में ‘P’ की अलग-अलग व्याख्या की जाती है। मायावती ने दावा किया कि सपा पिछड़े वर्गों में अपनी जाति के अलावा अन्य पिछड़ी जातियों, अल्पसंख्यकों तथा सवर्ण समाज, विशेषकर ब्राह्मणों के हितों के प्रति गंभीर नहीं रही है।
सपा सरकारों पर कानून-व्यवस्था को लेकर आरोप
बसपा प्रमुख ने सपा की पूर्ववर्ती सरकारों पर दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और सवर्ण समाज के शोषण एवं उत्पीड़न का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सपा शासन में विकास और जनहित के बजाय अपराधी, माफिया और अराजक तत्वों को लाभ मिला। मायावती ने कानून-व्यवस्था को लेकर भी सपा सरकारों पर गंभीर सवाल उठाए।
‘2027 में सपा को सत्ता से दूर रखें’
मायावती ने अपने बयान के जरिए आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी जनता को राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने सर्वसमाज के लोगों से अपील की कि वे सपा की कथित जातिवादी और संकीर्ण राजनीति से सावधान रहें तथा उत्तर प्रदेश में सपा को सत्ता में आने से रोकें। मायावती के ताजा बयान को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा के खिलाफ बसपा की राजनीतिक रणनीति को धार देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।




