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सावन के प्रथम दिन दूधेश्वरनाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक

श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज बोले— सावन में शिव आराधना से दूर होते हैं कष्ट, पूर्ण होती हैं मनोकामनाएं

गाजियाबाद (आप अभीतक)। सावन मास के प्रथम दिन सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। प्रातःकाल से ही भगवान दूधेश्वर महादेव के जलाभिषेक एवं पूजन-अर्चन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘भगवान दूधेश्वर की जय’ के जयघोषों से गूंज उठा। गाजियाबाद सहित देश के विभिन्न शहरों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान दूधेश्वर का विधि-विधान से जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की। सावन के पावन अवसर पर मंदिर के पीठाधीश्वर, जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता, दिल्ली संत महामंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष, जूना अखाड़ा की 13 मढ़ी के अध्यक्ष एवं हिंदू यूनाइटेड फ्रंट के अध्यक्ष पूज्य गुरुदेव श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने भगवान दूधेश्वर महादेव का विशेष रुद्राभिषेक एवं पूजन संपन्न कराया। वहीं प्राचीन देवी मंदिर, द्वारका पुरी (दिल्ली गेट) के महंत गिरिशानंद गिरि महाराज ने प्रातः 3:30 बजे भगवान की मंगल आरती एवं पूजा-अर्चना की। मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा और पूरा वातावरण शिवमय हो गया। देशभर से आए श्रद्धालुओं ने श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज से भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर महाराजश्री ने कहा कि सावन मास सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। यह भगवान शिव का सर्वाधिक प्रिय मास है और मान्यता है कि इस दौरान स्वयं भगवान शिव अपने भक्तों के कष्टों का निवारण करने के लिए पृथ्वी पर निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु इस पावन माह में सच्चे मन से भगवान शिव का पूजन करते हैं या केवल जल अर्पित करते हैं, भगवान शिव उनकी समस्त बाधाएं, रोग, संकट और दुःख दूर कर जीवन को सुख-समृद्धि से भर देते हैं। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ महादेव की आराधना से जन्म-जन्मांतर के पापों का भी नाश होता है तथा भगवान दूधेश्वर की असीम कृपा से भक्तों की प्रत्येक मनोकामना पूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सावन मास का शुभारंभ गुरुवार से होने के कारण भगवान शिव के साथ भगवान श्रीहरि विष्णु की विशेष कृपा का भी शुभ संयोग प्राप्त हो रहा है। महाराजश्री ने बताया कि सावन के प्रथम दिन आयुष्मान योग, सौभाग्य योग और श्रवण नक्षत्र का अत्यंत दुर्लभ एवं शुभ संयोग बना है। आयुष्मान योग दीर्घायु एवं उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्रदान करता है, सौभाग्य योग जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आता है, जबकि श्रवण नक्षत्र भगवान शिव की आराधना एवं आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। अंत में श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने भगवान दूधेश्वर महादेव से देश, प्रदेश एवं समस्त मानव समाज के सुख, शांति, उत्तम स्वास्थ्य और कल्याण की प्रार्थना करते हुए सभी श्रद्धालुओं पर भगवान शिव की असीम कृपा बनाए रखने का आशीर्वाद दिया।

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