बरेली में शहर विधान सभा सीट मजबूत
2027 में टिकट को लेकर फिर भी उठे सवाल
भाजपा अनुभव और मजबूत चुनावी रिकॉर्ड पर भरोसा करेगी या पीढ़ी परिवर्तन के नाम पर नए चेहरे को मैदान में उतारेगी?
बरेली। विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ बरेली शहर सीट पर भाजपा के मौजूदा विधायक एवं मंत्री डॉ. अरुण कुमार को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। सोशल मीडिया पर वरिष्ठ पत्रकार विनोद कुमार जोशी की एक पोस्ट में सवाल उठाया गया है कि लगातार तीन चुनाव जीतने वाले अरुण कुमार पर भाजपा 2027 में फिर भरोसा जताएगी या उम्र और नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की रणनीति के तहत किसी नए चेहरे को मौका देगी।
2022 के विधानसभा चुनाव में डॉ. अरुण कुमार ने 1,29,014 वोट हासिल कर सपा प्रत्याशी राजेश कुमार अग्रवाल को 32,320 वोटों के अंतर से हराया था। उन्हें करीब 53.77 प्रतिशत वोट मिले थे। 2012 से लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीतने का रिकॉर्ड भी उनके पक्ष में मजबूत आधार माना जा रहा है।
हालांकि, भाजपा में उम्र और पीढ़ी परिवर्तन का मुद्दा नया नहीं है। शायद इसलिए, पार्टी ने पहले भी वरिष्ठ नेताओं के बाद नई पीढ़ी को अवसर देने की रणनीति अपनाई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद संतोष गंगवार और भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेश अग्रवाल ताजा उदाहरण हैं।
सवाल यह भी है कि यदि भाजपा 2027 में बरेली शहर सीट पर चेहरा बदलती है तो नए प्रत्याशी के सामने अरुण कुमार के चुनावी प्रदर्शन, स्थानीय समीकरण, संगठन में स्वीकार्यता और कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ जैसी कसौटियां महत्वपूर्ण होंगी।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि डॉ. अरुण कुमार का लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीतना और 2022 में करीब 32 हजार वोटों की मजबूत बढ़त दर्ज करना उनके पक्ष में सबसे बड़ा आधार है। ऐसे में केवल उम्र के आधार पर टिकट में बदलाव करना भाजपा के लिए आसान फैसला नहीं होगा। दूसरी ओर, यदि पार्टी संगठन में नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाती है तो बरेली शहर सीट पर नए चेहरे की तलाश भी स्वाभाविक है।
विशेषज्ञों के मुताबिक टिकट का फैसला केवल उम्र या जीत के आंकड़ों से नहीं, बल्कि आगामी चुनावी समीकरण, संगठनात्मक फीडबैक, क्षेत्र में सक्रियता और जीत की संभावनाओं को ध्यान में रखकर किया जाएगा। फिलहाल अरुण कुमार का मजबूत चुनावी रिकॉर्ड उन्हें दावेदारी में आगे रखता है, लेकिन 2027 तक राजनीतिक परिस्थितियां क्या करवट लेती हैं, यह देखने वाली बात होगी।
यही वजह है कि बरेली शहर सीट पर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है—भाजपा अनुभव और मजबूत चुनावी रिकॉर्ड पर भरोसा करेगी या पीढ़ी परिवर्तन के नाम पर नए चेहरे को मैदान में उतारेगी?




