हरेला केवल पर्व नहीं, प्रकृति संरक्षण का जनसंकल्प है : समाजसेवी विनोद पंत
कर्क संक्रांति के साथ उत्तराखंड में हरेला पर्व का शुभारंभ, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकता का दिया संदेश
गाजियाबाद (आप अभीतक)। कर्क संक्रांति एवं उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के शुभ अवसर पर समाजसेवी विनोद पंत ने प्रदेशवासियों और देशभर में रह रहे उत्तराखंड मूल के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेला केवल एक धार्मिक अथवा पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और मानवीय संवेदनाओं के संरक्षण का सशक्त संदेश देने वाला लोकपर्व है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा में हरेला का विशेष महत्व है। यह पर्व हरियाली, कृषि, समृद्धि और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक है। वर्तमान समय में जब पर्यावरण संरक्षण पूरी दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती बन चुका है, ऐसे में हरेला का संदेश और अधिक प्रासंगिक हो जाता है। विनोद पंत ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को इस अवसर पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए तथा उसके संरक्षण का भी संकल्प लेना चाहिए। वृक्षारोपण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से प्रकृति संरक्षण, जल संरक्षण और स्वच्छ पर्यावरण के लिए जनभागीदारी बढ़ाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हमें प्रकृति को देवतुल्य मानने की प्रेरणा देती है। हरेला का पर्व इसी विचार को सशक्त करता है कि मानव और प्रकृति का संबंध परस्पर सहयोग और संरक्षण का है। यदि हम पर्यावरण को सुरक्षित रखेंगे तो आने वाली पीढ़ियों को भी स्वस्थ और समृद्ध जीवन मिल सकेगा। समाजसेवी विनोद पंत ने सभी नागरिकों से हरेला पर्व को सामाजिक सद्भाव, पर्यावरण जागरूकता और जनकल्याण के संकल्प के साथ मनाने का आह्वान करते हुए सभी के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना की।




