2027 विधानसभा चुनाव में भंडारे पर चढ़ा सियासी रंग
भंडारे की थाली में सेवा के साथ घुला सियासत का स्वाद, वोटरों को साधने में जुटीं राजनीतिक पार्टियां
बरेली। विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में भी सियासी सक्रियता नजर आने लगी है। शहर में भंडारे और अन्य सामुदायिक कार्यक्रम अब सिर्फ सेवा और धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं दिख रहे, बल्कि इनमें राजनीतिक दावेदारों और नेताओं की मौजूदगी भी बढ़ने लगी है।
विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं द्वारा ऐसे आयोजनों का चलन बढ़ गया है, साथ ही ऐसे आयोजनों में खुद भी पहुंचकर लोगों से संवाद कर रहे हैं। कहीं प्रसाद वितरण में सहभागिता तो कहीं आयोजकों से मुलाकात के जरिए जनसंपर्क साधने की कोशिश हो रही है। खासकर विधानसभा सीटों पर टिकट की दावेदारी कर रहे नेताओं के लिए ये कार्यक्रम जनता के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का मौका बन गए हैं। ऐसे में धार्मिक-सामाजिक आयोजनों में सक्रियता को भी चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
भंडारे में अधिक से अधिक भीड़ एकत्रित कर उमड़ने वाली भीड़ के बीच नेताओं का पहुंचना और लोगों से सीधे संवाद करना आने वाले चुनाव की तैयारी का संकेत माना जा रहा है। चुनाव अभी दूर है, लेकिन दावेदारों की सक्रियता देखकर इतना जरूर कहा जा सकता है कि भंडारे की थाली में सेवा के साथ सियासत का स्वाद भी घुलने लगा है।
राजनीतिक जानकारों की नजर में आने वाले महीनों में ऐसे आयोजनों में नेताओं की सक्रियता और बढ़ सकती है। हालांकि इसे सीधे तौर पर वोटरों को साधने की रणनीति कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन चुनावी मौसम से पहले जनसंपर्क का यह तरीका सियासी हलकों में चर्चा जरूर बटोर रहा है।




