एसीबीएम तकनीक से सुरक्षित है गंगा का तटबंध
अधिशासी अभियंता बोले-एप्रन का लॉन्च होना तकनीक का हिस्सा
-तटबंध पर कहीं कटान या टूट-फूट नहीं, 24 घंटे निगरानी जारी
बिजनौर, संवाददाता। गंगा नदी के बाएं तटबंध की सुरक्षा को लेकर सिंचाई विभाग का कहना है कि तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है। करीब एक किलोमीटर लंबाई में आधुनिक एसीबीएम तकनीक से किए गए सुरक्षात्मक कार्य में कुछ स्थानों पर एप्रन का लॉन्च होना तकनीकी प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे तटबंध के क्षतिग्रस्त होने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।
मध्यगंगा बैराज खंड-5 के अधिशासी अभियंता कर्णपाल ने बताया कि तटबंध के ढलान पर करीब आठ से 10 मीटर और उसके आगे 24 से 26 मीटर तक एसीबीएम को एप्रन के रूप में बिछाया गया है। इसका उद्देश्य गंगा की तेज धारा से तटबंध को होने वाले कटाव से बचाना है। तेज बहाव के तटबंध की ओर प्रहार करने पर एप्रन का निर्धारित हिस्से में लॉन्च होकर नदी की धारा के सामने सुरक्षा दीवार जैसा आकार लेना इस तकनीक की कार्यप्रणाली का हिस्सा है।
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तेज बहाव के बीच एप्रन हो रहा लॉन्च
वर्तमान में गंगा का जलस्तर बढ़ने और धारा का दबाव बढ़ने के कारण कुछ स्थानों पर एसीबीएम एप्रन नियमानुसार लॉन्च हो रहा है। सिंचाई विभाग का कहना है कि इससे तटबंध की सुरक्षा प्रभावित नहीं हो रही है। विभाग ने स्पष्ट किया कि तटबंध पर कहीं भी कटान या टूट-फूट की समस्या नहीं है।
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24 घंटे निगरानी, बचाव के इंतजाम
अधिशासी अभियंता कर्णपाल ने बताया कि बाढ़ नियंत्रण को लेकर सिंचाई विभाग की टीम तटबंध की 24 घंटे निगरानी कर रही है। नदी की तेज धारा का प्रभाव कम करने के लिए बल्ला कटर और मिट्टी से भरे नायलॉन क्रेट (बोरे) लगाए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखा गया है।




