खोड़ा के विकास पर अमरपाल शर्मा का बड़ा दावा—‘तीन साल में बदल जाती पूरी तस्वीर’
पूर्व विधायक बोले—प्रस्ताव समय पर मंजूर होते तो विकास खुद बोलता नजर आता, राजनीतिक दबाव ने रोकी रफ्तार
गाजियाबाद। खोड़ा के विकास को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज होती दिखाई दे रही है। पूर्व विधायक पंडित अमरपाल शर्मा ने क्षेत्र के विकास कार्यों और अपनी पूर्व पहल को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि यदि उनके द्वारा प्रस्तावित विकास योजनाओं को समय रहते मंजूरी मिल गई होती तो महज तीन वर्षों में खोड़ा की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती थी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावों पर काम आगे बढ़ता तो आज खोड़ा में विकास की रफ्तार दिखाई देती और क्षेत्र की कई बुनियादी समस्याएं काफी हद तक दूर हो चुकी होतीं।
अमरपाल शर्मा ने आरोप लगाया कि राजनीतिक परिस्थितियों के चलते विकास से जुड़े कई प्रस्तावों की गति प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की अपनी प्रशासनिक सीमाएं होती हैं। कई अधिकारी विकास कार्यों को लेकर सकारात्मक रहते हैं, लेकिन कई बार राजनीतिक दबाव के कारण निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है। उन्होंने कहा कि ‘कई बार अधिकारी तैयार होते हैं, लेकिन ऊपर से फोन आ जाने के बाद वे भी मजबूर हो जाते हैं।’ पूर्व विधायक ने कहा कि वर्तमान में विपक्ष में होने के कारण उनकी भूमिका और अधिकार पहले की अपेक्षा सीमित हैं। वह चाहकर भी विकास कार्यों को उस गति से आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं, जिस गति से वह चाहते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष में होने से जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारी कम नहीं हुई है।
‘सरकार बदलना राजनीतिक प्रक्रिया, विकास जनता की जरूरत’
अमरपाल शर्मा ने कहा कि सरकारों का बनना और बदलना लोकतांत्रिक एवं राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन विकास किसी दल की नहीं, बल्कि जनता की आवश्यकता है। उनका कहना है कि खोड़ा की जनता लंबे समय से बेहतर शिक्षा व्यवस्था, सड़क, जल निकासी, स्वच्छता, बुनियादी सुविधाओं और सुनियोजित विकास की अपेक्षा कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में राजनीतिक परिस्थितियां बदलेंगी और खोड़ा के विकास को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास किसी व्यक्ति या दल के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका लक्ष्य खोड़ा को बेहतर सुविधाओं वाला विकसित क्षेत्र बनाना है।
‘जनता ने काम पर भरोसा जताया, मोहिनी शर्मा को चेयरमैन चुना’
पूर्व विधायक ने कहा कि खोड़ा की जनता क्षेत्र की वास्तविक स्थिति और विकास के लिए किए गए प्रयासों से भली-भांति परिचित है। उन्होंने कहा कि जनता के इसी विश्वास का परिणाम है कि उनकी पत्नी मोहिनी शर्मा को नगर पालिका चेयरमैन चुना गया।
अमरपाल शर्मा ने कहा कि यदि पूर्व में चुने गए चेयरमैनों ने भी विकास कार्यों को उतनी ही गंभीरता और प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया होता, तो आज खोड़ा की तस्वीर कहीं अधिक बेहतर होती। उन्होंने कहा कि नगर क्षेत्र के विकास के लिए केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति, प्रभावी कार्ययोजना और लगातार निगरानी की आवश्यकता है।
शिक्षा से बुनियादी सुविधाओं तक—विकास को लेकर बड़ी तस्वीर
अमरपाल शर्मा ने कहा कि उनका लक्ष्य खोड़ा को केवल राजनीतिक चर्चाओं का विषय बनाना नहीं, बल्कि इसे शिक्षा, आधारभूत सुविधाओं, स्वच्छता, बेहतर सड़क व्यवस्था, जल निकासी और सुनियोजित विकास के रास्ते पर आगे ले जाना है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को बेहतर अवसर मिलें, यही उनकी प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए भले ही उनके अधिकार सीमित हों, लेकिन जनता के सवालों पर उनकी आवाज सीमित नहीं होगी। खोड़ा की समस्याओं को लेकर वह संबंधित अधिकारियों और शासन स्तर तक अपनी बात पहुंचाते रहेंगे तथा विकास के लिए हरसंभव प्रयास जारी रखेंगे।
‘ना झुकेंगे, ना रुकेंगे’—खोड़ा के भविष्य को लेकर अमरपाल का संकल्प
पूर्व विधायक ने दो टूक कहा कि खोड़ा के बेहतर भविष्य की लड़ाई किसी एक चुनाव या कार्यकाल तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “ना झुकेंगे, ना रुकेंगे। खोड़ा के बेहतर भविष्य के लिए लड़ते रहे हैं और आगे भी लड़ते रहेंगे।’
विकास बन सकता है स्थानीय राजनीति का बड़ा मुद्दा
अमरपाल शर्मा के इस बयान ने खोड़ा के विकास को एक बार फिर स्थानीय राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है। क्षेत्र में सड़क, जल निकासी, शिक्षा, स्वच्छता, मूलभूत सुविधाएं और सुनियोजित विकास लंबे समय से जनता की प्रमुख अपेक्षाओं में शामिल रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में खोड़ा के विकास को लेकर राजनीतिक दलों के दावों, उपलब्धियों और जनता की अपेक्षाओं के बीच मुकाबला और तेज होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि विकास के इन दावों के बीच खोड़ा की जनता आने वाले दिनों में किसे अपने भविष्य की उम्मीद के तौर पर देखती है और क्षेत्र के विकास का राजनीतिक एजेंडा किस दिशा में आगे बढ़ता है।




