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दिल्ली चलो प्रदर्शन: किसान संगठनों को केन्द्र का बातचीत का प्रस्ताव मंजूर

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इमरान खान
नई दिल्ली। नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने केन्द्र की ओर से भेजा गया बातचीत का प्रस्ताव स्वीकार करने का फैसला किया है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सोमवार को कोविड-19 और ठंड का हवाला देते हुए किसान संगठनों के नेताओं को तीन दिसंबर के बजाय मंगलवार को ही बातचीत के लिए बुलाया है।

किसान नेता बलजीत सिंह महल ने कहा कि हमारी बैठक में हमने केन्द्र का आज दोपहर तीन बजे बातचीत करने का प्रस्ताव स्वीकार करने का फैसला किया है। प्रदर्शन कर रहे किसानों के प्रतिनिधि केन्द्रीय मंत्रियों से मुलाकात करेंगे।

केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ हजारों किसान दिल्ली से लगी सीमाओं पर मंगलवार को लगातार छठे दिन डटे हैं। किसानों को आशंका है कि इन कानूनों के कारण न्यूनतम समर्थन मूल्य समाप्त हो जाएगा। तोमर ने सोमवार को कहा था कि कोविड-19 और ठंड के मद्देनजर हमने किसान संगठनों के नेताओं को पूर्वनिर्धारित तीन दिसंबर की बैठक से पहले चर्चा के लिए आमंत्रित किया है।

उन्होंने बताया कि अब यह बैठक एक दिसंबर को दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में दोपहर तीन बजे बुलाई गई है। उन्होंने बताया कि 13 नवंबर को हुई बैठक में शामिल सभी किसान नेताओं को इस बार भी आमंत्रित किया गया है।

दिल्ली: बुराड़ी के निरंकारी समागम ग्राउंड में कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की मांग कर रहे थे। लेकिन सरकार ने हमारे ऊपर तीन काले क़ानून थोप दिए।”
किसानों ने सोमवार को कहा था कि वे निर्णायक लड़ाई के लिए दिल्ली आए हैं और साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री से उनकी मन की बात सुनने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि उनकी मांगें पूरी होने तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

वहीं, न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब के महासचिव ने कहा कि कल देर रात सरकार से चिट्ठी आई जिसमें पंजाब के 32 किसान संगठनों को बातचीत का न्योता दिया गया। देश के सभी संगठनों को बुलावा नहीं भेजा गया, ये देश के किसानों में फूट डालने वाली बात है। हमने बैठक में नहीं जाने का फैसला किया है। बातचीत से पहले ही प्रधानमंत्री जी ने फैसला सुना दिया है​ कि हमारे कृषि कानून बहुत बढ़िया हैं तो इस तरह के माहौल में बातचीत का अंदाजा हमें लग गया है।

बता दें कि किसान हाल ही बनाए गए तीन नए कृषि कानूनों – द प्रोड्यूसर्स ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फैसिलिटेशन) एक्ट, 2020, द फार्मर्स ( एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑन प्राइस एश्योरेंस एंड फार्म सर्विसेज एक्ट, 2020 और द एसेंशियल कमोडिटीज (एमेंडमेंट) एक्ट, 2020 का विरोध कर रहे हैं।

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