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बिहार: जीरो पर आउट होते-होते बची चिराग की लोजपा, मटिहानी में 333 वोट से जीता प्रत्याशी

पटना। बिहार चुनाव के लिए जब तारीखों का एलान हुआ तो सबसे हैरानी भरा फैसला लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने लिया था। चिराग पासवान की अध्यक्षता वाली लोजपा ने नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला और अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया। हालांकि लोजपा एक ही सीट जीत सकी वह भी मात्र 333 वोटों से। गौर करने वाली बात यह रही कि चिराग की पार्टी केंद्र में एनडीए गठबंधन का हिस्सा बनी रही, लेकिन राज्य में इससे अलग हो गई।

लोजपा ने जिस तरह अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतारा। उससे जदयू, हम और वीआईपी ही नहीं भाजपा को भी कुछ सीटें गंवानी पड़ी है।

मटिहानी विधानसभा सीट से लोजपा के राजकुमार सिंह जीते
बेगुसराय की जिस मटिहानी सीट से लोजपा को जीत मिली है, वहां से लोजपा प्रत्याशी राजकुमार सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और जदयू प्रत्याशी नरेंद्र कुमार सिंह उर्फ बोगो सिंह को हराया। हालांकि, चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, राजकुमार सिंह ने जदयू प्रत्याशी को महज 333 वोटों से हराया।

लोजपा को मटिहानी में मिली जीत से कुछ हद तक उसकी राजनीतिक साख बच गई है। अगर पार्टी यहां से भी चुनाव हार गई होती तो राज्य में उसका सूपड़ा साफ हो जाता। हालांकि, एग्जिट पोल ने भी दर्शाया था कि लोजपा को राज्य में ज्यादा सीटें नहीं मिलने वाली हैं। खुद तो डूबे लेकिन एनडीए के चार दर्जन प्रत्याशियों को भी डुबाया
दूसरी तरफ, भले ही इस विधानसभा चुनाव में लोजपा का प्रदर्शन बहुत खराब रहा है, लेकिन चिराग पासवान के नेतृत्व वाली पार्टी ने एनडीए के चार दर्जन प्रत्याशियों की नैया डुबा दी है। लोजपा प्रत्याशियों के चलते जदयू को 34 सीटों पर नुकसान हुआ। वहीं, लोजपा के कारण जदयू के अलावा हम, वीआईपी पार्टी संग भाजपा को भी कुछ सीटों पर हार मिली है।

चुनाव प्रचार के दौरान लोजपा प्रमुख चिराग पासवान ने नारा दिया, ‘भाजपा से बैर नहीं, नीतीश तेरी खैर नहीं’। वहीं, चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, अगर लोजपा प्रत्याशियों को मिले वोट और एनडीए उम्मीदवारों को मिले वोट को जोड़ दिया जाए, तो यह महागठबंधन के जीते प्रत्याशियों को मिले वोट से अधिक होता है। कई सीटों पर जदयू प्रत्याशियों की तुलना में लोजपा के उम्मीदवारों को अधिक वोट मिले हैं।

लोजपा ने भागलपुर सीट पर अपने प्रत्याशियों को खड़ा किया, जिसका खामियाजा भाजपा को हारकर चुकाना पड़ा। राघोपुर में तेजस्वी को मिली जीत का कारण लोजपा को ही माना जा रहा है। लोजपा बिहार चुनाव में सात सीटों पर दूसरे स्थान पर काबिज रही। इस तरह इन सीटों पर जदयू और हम प्रत्याशियों के मुकाबले लोजपा उम्मीदवारों को अधिक वोट मिले।

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