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बाबा टिकैत के अनुयाइयों की परीक्षा का दिन है कल

संसद से बाहर किसानों की आवाज उठाने में फेल रहे हैं विपक्षी दल

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गाजियाबाद। केंद्र सरकार ने खेती और किसानी को लेकर तीन नए कानून बनाए हैं। सत्तारूढ़ दल और कुछ अन्य राजनीतिक दल इन कानूनों का समर्थन कर रहे हैं। दूसरी तरफ भारतीय किसान यूनियन और अन्य कई किसान संगठन व विपक्षी दल इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं। किसान संगठन इन कानूनों को घातक मानते हुए कल किसान कर्फ्यू की घोषणा कर चुके हैं।
बहुत समय नहीं बीता है जब भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक अध्यक्ष किसान नेता बाबा टिकैत ने किसानों के हित में कई ऐसे आंदोलन खड़े किए थे जिसने सरकारों को झुकने के लिए मजबूर कर दिया था। वह सब कुछ बाबा महेंद्र सिंह टिकैत की संगठन शक्ति का कमाल था जिसके बल पर उन्होंने धर्म और जातियों से परे हटकर किसानों को एकजुट किया था। उनकी मौत के बाद किसान जैसे अनाथ हो गया है। उनके उत्तराधिकारी किसान हितों की बात करते हैं। कई बार उन्होंने दिल्ली तक लंबा कूच भी किया है लेकिन परिणाम किसी भी कूच का कुछ नहीं निकला है। किसान जब भी दिल्ली पहुंचता है अधिकारियों से वार्तालाप होने के बाद वापस हो जाता है लेकिन होता कुछ नहीं है।
भारतीय किसान यूनियन में अब नए कानूनों के विरोध में कल किसान कर्फ्यू की घोषणा की है। किसान कर्फ्यू के दौरान एनसीआर के सभी प्रमुख मार्गों पर किसान रास्ता रोकने की घोषणा कर चुके हैं। अब सरकार और भारतीय किसान यूनियन के बीच शक्ति परीक्षण होना तय है। कल का शक्ति परीक्षण यह तय करेगा कि बाबा टिकैत के उत्तराधिकारी उनके जैसा दमखम रखते हैं अथवा नहीं। कल का किसान कर्फ्यू उत्तर प्रदेश में भविष्य की राजनीति की दिशा भी तय करेगा। कल के किसान कर्फ्यू के बाद जो ध्रुवीकरण होगा वे उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होना है।

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