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सामाजिक दूरियां पैदा कर रहा है कोरोना का यह समय

सामाजिक दूरियां पैदा कर रहा है कोरोना का यह समय

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24 मार्च को कोरोना से बचाव के लिए लागू किए गए लॉकडाउन ने देश और समाज के सामने अनेक तरह की विषम परिस्थितियां पैदा की हैं। हर तरह के उद्योग धंधे और सेवा कार्य बंद होने के कारण देश और समाज दोनों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हुआ है जो लगातार बढ़ता जा रहा है। आर्थिक संकट के चलते अनेक घर और परिवार टूटने की हालत में पहुंच गए हैं। इस परिस्थिति में सामाजिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है। महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि आर्थिक संकट के चलते लोगों में मानसिक अवसाद की स्थिति घर करती जा रही है। अवसाद के कारण अनेक लोग अब तक आत्महत्या कर चुके हैं। यह स्थिति उन परिवारों के लिए अत्यंत दुख दायक है जिनकी आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी और अब कोरोना काल के बाद लगातार कमजोर होती जा रही है। इस मुद्दे का दुखदायक पहलू यह है कि हमारी सरकारों ने इस तरफ कोई भी कदम नहीं उठाया है। हमारी सरकारें और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि यह बात लगातार दोहरा रहे हैं कि हम कोरोनावायरस संक्रमण के मुद्दे पर विदेशों के मुकाबले ज्यादा मजबूती के साथ लड़ रहे हैं। यही जनप्रतिनिधि और सरकारें यह भूल जाते हैं कि संपूर्ण लोक डाउन के दौरान विदेशों की सरकारों ने अपने नागरिकों को नकद आर्थिक सुविधा उपलब्ध कराई थी ताकि वह अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें। दूसरी तरफ भारत में लोगों को भाग्य के भरोसे छोड़ दिया गया है। यह बात हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तब कही थी जब उन्होंने यह कहा कि यह भगवान का किया हुआ है हम क्या कर सकते हैं। चुनी हुई सरकारों और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी होती है कि वह अपनी जनता के प्रति जिम्मेदार रहें। इस जिम्मेदारी को उठाने में अनेक तरह की परेशानी सामने आ सकती है लेकिन परेशानी को तो जनता झेल ही रही है। हालत यह है कि हमारी केंद्र सरकार कोरोना से निपटने पर उतरा ध्यान नहीं दे रही है जितना ध्यान इस बात पर है कि उन मुद्दों को निपटा लिया जाए जिनका आम दिनों में भारी विरोध हो सकता था। अब महामारी अधिनियम के नाम पर विरोध को दबाया जा रहा है और उन सब महत्वपूर्ण संस्थानों को निजी हाथों में दिया जा रहा है जो भारतवर्ष की नींव का काम कर रहे थे। आज की ताजा खबरें भारत का सबसे बड़ा हवाई अड्डा सांताक्रुज का भी 74% हिस्सा गुजरात मूल के उद्योगपति अडानी को दे दिया गया है। हालात अभी बहुत विपरीत हैं। कोरोना संक्रमण की दर प्रतिदिन तेजी से बढ़ रही है। कोरोना के मृतकों की संख्या की लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों की माने तो अभी यह कोरोनावायरस का उच्चतम स्तर नहीं है। यह सोचकर ही डर लगने लगता है कि यदि यह उच्चतम स्तर नहीं है तो तब क्या हालत होगी जब संक्रमण की उच्चतम स्तर आएगी।

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