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मोदीनगर में पहले भी खूनी रंजिश में बहा है कई लोगों का खून आप अभी तक

मोदीनगर में पहले भी खूनी रंजिश में बहा है कई लोगों का खून आप अभी तक

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गाजियाबाद। मोदीनगर में अक्षय सांगवान की हत्या के बाद गैंगवार की आशंका बनी हुई है। पिछले काफी दिनों से मोदीनगर क्षेत्र शांत था लेकिन इस क्षेत्र में लगभग एक दशक पूर्व भी खूनी गैंगवार हुई थी जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी। उस समय केबल नेटवर्क के व्यापार पर कब्जा करने के लिए दो गुटों के बीच खूनी संघर्ष हुआ था।
अक्षय सांगवान और 1 वर्ष पूर्व हुई दीपेंद्र की हत्या शराब के ठेके और उसकी कैंटीन के विवाद को लेकर हुई हैं। देसी शराब की दुकान पहले अक्षय के पिता जितेंद्र चौधरी के मकान में थी। बाद में ठेकेदार ने दुकान हटाकर दीपेंद्र के मकान में खोल ली। ठेका और उसकी कैंटीन चले जाने से अक्षय परिवार का आय का बड़ा साधन खत्म हो गया था। इस पर दीपेंद्र और अक्षय के बीच दोस्ती दुश्मनी में बदल गई। इसी बीच अप्रैल 2019 में दीपेंद्र की हत्या हुई जिसमें अक्षय को भी गोली लग गई थी। अक्षय कुछ समय पूर्व मेडिकल आधार पर जेल से बाहर आ गया था जबकि उसका भाई सनी और तीन दोस्त अभी भी दीपेंद्र की हत्या के आरोप में जेल में हैं। अक्षय की हत्या ना आरोपित पालिका सभासद के पति सप्पू गुर्जर ने चेतावनी दी है कि रणभूमि स चुकी है अभी बहुत कुछ होना है। इस पोस्ट के बाद पुलिस विभाग में भी गैंगवार की आशंका को लेकर हड़कंप है।
मोदीनगर के पुराने लोग गवाह है कि केबल नेटवर्क के व्यापार पर कब्जा करने के प्रयास में दो गुटों के बीच व्यापारिक मतभेद खूनी रंजिश में बदल गए थे। इस खूनी रंजिश में मोदीनगर में लगभग आधा दर्जन युवकों की जान गई थी। एक दशक पूर्व हुई इस गैंगवार के घाव अभी तक मोदीनगर में ताजा हैं। मोदीनगर ने इसके अलावा भी अनेक लोगों का खून बहते देखा है। मोदी समूह के कारखानों में मजदूर यूनियनों पर कब्जा करने के लिए भी मोदीनगर में कई श्रमिक नेताओं की हत्या हुई हैं। इनमें पाल नामक एक श्रमिक नेता को दिनदहाड़े गोलियों से भून आ गया था। इसके अलावा कपड़ा मिल बंद होने के बाद मजदूरों के आंदोलन के दौरान भी कई बार हिंसक झड़प हुई हैं जिनमें कई लोगों की जान भी गई है। कपड़ा मिल मजदूरों के आंदोलन में मोदी समूह पर भी आरोप लगता रहा है कि मजदूर नेताओं का मुंह बंद करने के लिए फैक्ट्री के अंदर ही कई लोगों की हत्या की गई थी। यह अलग बात है कि इन खबरों की कभी पुष्टि नहीं हो सकी। इस कारण यह केवल अनुमान पर ही रह गई।
अब एक बार फिर गैंगवार की आशंका पैदा हो गई है जिसे देखते हुए पुलिस ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। अक्षय की हत्या में विधायक पति को नामजद किए जाने के बाद उनके अस्पताल पर पुलिस का पहरा लगा दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी को भी क्षेत्र की शांति भंग नहीं करने दी जाएगी।

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