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प्रेम जाल में फंसा कर ब्लैक मेलिंग की वारदातों में तेजी से वृद्धि

रेकी करने के बाद पैसे वालों को फसाया जाता है प्रेम जाल में अकेले, नोएडा में ही तेजी से बढ़ रहे हैं हनीट्रैप के मामले

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गाजियाबाद आप अभी तक । आधुनिक जीवन शैली और हर हाथ में पहुंचने एंड्राइड फोन जहां लोगों के लिए सुविधाजनक हैं वही अनेक तरह से हानिकारक भी बन रहे हैं। फोन पर सोशल मीडिया ने इस समय समाज के बीच बड़ी जगह बनाई है लेकिन यही सोशल मीडिया साइबर क्राइम और हनी ट्रैप जैसे अपराधों में अपराधियों के लिए सहायक साबित हो रहा है। व्हाट्सएप या मैसेंजर पर एक छोटी सी काल और यदि उसे सुन लिया और सुन कर उस आवाज के जाल में फंस गए जो सुरीली आवाज आपसे बात कर रही थी तो उसके बाद आप जाल में फंसते चले जाएंगे। परिणाम होगा लाखों रुपए ब्लैक मेलिंग में देना और न देने पर सामाजिक बदनामी झेलना।
हाल ही में अकेले नोएडा में स्पेशल टास्क फोर्स यानी कि एसटीएफ ने 10 से ज्यादा मामले हनी ट्रैप के ऐसे पकड़े हैं जिन की व्यापक जांच पड़ताल के बाद पता चला है कि मेवात क्षेत्र की महिला है इस गिरोह का संचालन कर रही थी। एसटीएफ ने जांच पड़ताल में पता लगाया कि कई मामलों में महिलाओं में सोशल मीडिया या मोबाइल फोन पर संपर्क कर लोगों को अपने प्रेम जाल में फंसाया और फिर ब्लैकमेल कर लाखों रुपए ठगे। सर्विलांस और अन्य कई वैज्ञानिक आधारों पर की गई जांच पड़ताल से जानकारी मिली की मेवात क्षेत्र के साथ-साथ भरतपुर मथुरा और नूंह में हनी ट्रैप के माफिया का गिरोह सक्रिय रहा है। एसटीएफ को अपने सूत्रों से जो जानकारी मिली है उसके अनुसार हनी ट्रैप के इस ग्रुप में 100 से ज्यादा महिला और युवतियां शामिल हैं। गैंग के पुरुष सदस्य महिलाओं के फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाते हैं और इन फर्जी सोशल मीडिया पर जो फेसबुक आईडी बनाई जाती है उस पर किसी अन्य खूबसूरत युवती का फोटो लगा दिया जाता है। खूबसूरती को देखकर नव धनाढ्य विशेष तौर पर इन युवतियों के जाल में फंस जाते हैं। पहले इन्हें प्रेम जाल में फंसा जाता है इसके बाद इन लोगों को कहीं एकांत में बुलाकर इनके आपत्तिजनक फोटो ले लिए जाते हैं जो ब्लैक मेलिंग में सहायक बनते हैं। सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक फोटो वायरल करने या परिजनों को पहुंचाने की धमकी देकर नव धनाढ्य को ब्लैकमेल किया जाता है। पिछले दिनों एसटीएफ की जानकारी में आया है कि एनसीआर के कई वीआईपी भी इन महिलाओं के फंदे में आ चुके हैं। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के मंत्रियों और अधिकारियों का मामला बहुचर्चित रहा है। इस मामले में कई मंत्री और बड़े अधिकारी और मंत्रियों से जुड़े रहे लोग हनीट्रैप के शिकार हुए हैं। यह अलग बात है कि इस मामले को दबा दिया गया। एसटीएफ के अनुसार गिरोह की महिला अधिकतर अच्छी प्रोफाइल वाले लोगों को ही फंसाती है। जिन बैंक खातों में ब्लैक मेलिंग की रकम मनाई जाती है वह भी फर्जी निकलते हैं।
पिछले दिनों जनवरी 2020 में गुड़गांव के एक युवक को इस गिरोह ने फंसा लिया। दिल्ली में बीबीए कर रहे इस छात्र को हनी ट्रैप में फंसाने के बाद कीड़ों की रीना नाम की युवती ने युवक को वजीराबाद के एक फ्लैट पर बुला कर उससे शारीरिक संबंध बनाए जिसके फोटो ले लिए गए। इसके बाद युवक से 2000000 की मांग की गई। बुरी तरह घबरा ही युवक ने परिजनों से 2000000 रुपए भेजने के लिए कहा तो परिजन इतनी बड़ी रकम की बात सुनकर हैरान रह गए। उन्होंने सारी जानकारी पुलिस को दी जिसके बाद पुलिस ने इस गिरोह को दबोच लिया। गिरोहों में तीन युवतियां जो पश्चिम बंगाल की थी उन्हें गिरोह का मुखिया 40000 प्रति माह देता था। अप्रैल 2019 में राजौरी गार्डन इलाके का एक कारोबारी फेसबुक पर एक युवती के जाल में फंसा। बाद में इस कारोबारी को 2000000 रुपए देकर अपनी जान छुड़ानी पड़ी। यह अलग बात है कि यह कारोबारी और इसे फसाने वाली युवतियां पुलिस के जाल में फंस गए जो इन दिनों जेल में हैं। दिल्ली पुलिस का एक बर्खास्त सिपाही भी अपनी महिला मित्र के साथ हनी ट्रैप का गिरोह चलाता हुआ पकड़ा गया है इस सिपाही ने एक कारोबारी को फंसा कर उसका 1500000 रुपए का सोना हड़प लिया था। 12 मई 2019 को पुलिस ने तुगलकाबाद के जंगल से एक युवक का शव बरामद किया था। जांच पड़ताल में पुलिस के हाथ जो सूत्र लगे उनके अनुसार यह युवक हनी ट्रैप का शिकार हुआ था। ब्लैक मेलिंग में मांगी गई रकम न देने पर इसकी हत्या कर दी गई थी।
एसटीएफ का कहना है कि फेसबुक पर युवतियों के फोटो लगाकर अनेक फेक आईडी चल रही है जिन्हें यह संगठित गिरोह संचालित करता है। इसके अलावा फोन पर भी गिरोह की युवतियां पुरुष सदस्यों द्वारा चुनी गई लोगों को अपने जाल में फंसा कर ब्लैक मेलिंग का शिकार बनाती है। साइबर क्राइम और हनी ट्रैप के बढ़ते मामले सभी प्रदेशों की पुलिस के लिए चुनौती बन गए हैं। साइबर क्राइम से निपटने के लिए जहां पुलिस के पास पर्याप्त साधन नहीं है वही हनी ट्रैप में फंसा आदमी अपनी इज्जत के डर से पुलिस के पास भी नहीं जाता जिस कारण यह संगठित गिरोह लगातार पनप रहा है।

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