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गाजियाबाद : कूड़ा निस्तारण बड़ी चुनौती

गाजियाबाद : कूड़ा निस्तारण बड़ी चुनौती

महानगर गाजियाबाद को देश की राजधानी दिल्ली का द्वार कहा जाता है। इसका बड़ा कारण है यह भी पता नहीं चल पाता कि कब गाजियाबाद से दिल्ली में चले गए और कब दिल्ली से गाजियाबाद आ गए। देश की राजधानी से सटा होने के बावजूद गाजियाबाद महानगर विकास के उस पायदान पर नहीं चढ सका है जिस पर इसे होना चाहिए था। महानगर गाजियाबाद के विकास में अनेक चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी चुनौती महानगर से प्रतिदिन निकलने वाला कूड़ा है जिसका निस्तारण निगम अधिकारियों के लिए बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। निवर्तमान नगर आयुक्त दिनेश चंद्र सिंह ने महानगर गाजियाबाद को स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल कराने के लिए हर संभव प्रयास किया था लेकिन स्वच्छता के मोर्चे पर आकर हर बार गाजियाबाद आगे जाकर फिसल जाता था। पिछले एक दशक से महानगर के कूड़ा निस्तारण के लिए डंपिंग ग्राउंड की जमीन तय नहीं हो सकी है। डंपिंग ग्राउंड के लिए सबसे पहले विजयनगर क्षेत्र के गांव डूंडाहेड़ा में भूमि तय की गई थी। यहां कूड़ा निस्तारण के लिए आधुनिक संयंत्र लगाए जाने थे जिनके लिए केंद्र सरकार से धन राशि भी स्वीकृत हो गई थी। बाद में प्रस्तावित डंपिंग ग्राउंड के साथ विकसित हुई कालोनियों के चलते डंपिंग ग्राउंड की योजना कोर्ट में जाकर खटाई में पड़ गई। इसके बाद डंपिंग ग्राउंड के लिए कई स्थानों पर जमीन तय की गई लेकिन उन क्षेत्रों के ग्रामीणों द्वारा किए गए भारी विरोध के कारण आजतक डंपिंग ग्राउंड कहीं भी नहीं बन सका है। कूड़ा निस्तारण के लिए डंपिंग ग्राउंड के अभाव में नगर निगम को इधर उधर ही कूड़ा डालना पड़ता है। कई बार कूड़ा निस्तारण को लेकर विरोध की स्थिति पैदा हो जाती है। महानगर से इस समय निकलने वाली कुड़ी की हालत यह है कि यदि एक जगह कहीं डाला जाए तो एक बड़ा पहाड़ बन सकता है। जरूरत इस बात की है कि कूड़ा निस्तारण के लिए आधुनिक संयंत्र बनाने की जरूरत है जहां कूड़े से खाद अथवा अन्य वैज्ञानिक ढंग से उसका निस्तारण किया जाए। इसके लिए दृढ़ निश्चय और दूरदर्शिता की जरूरत है। स्थानीय नेतृत्व सब कुछ अफसरशाही पर छोड़कर केवल राजनीति कर रहे हैं। निगम के जिम्मेदार अधिकारियों के साथ-साथ महापौर और वरिष्ठ पार्षदों को इस मुद्दे पर गंभीरता के साथ कदम उठाने होंगे। दूसरी स्थिति में हर आने वाला दिन कूड़ा निस्तारण को लेकर बड़ी समस्या बनता चला जाएगा। निकटवर्ती शहर नोएडा में एक स्वयंसेवी संगठन ने कूड़े से कई उपयोगी पदार्थ बनाने का काम शुरू किया है। जिसका परिणाम यह है कि यह स्वयंसेवी संगठन नोएडा के कई सेक्टर का कूड़ा उठा रहा है। निकट भविष्य में यह संगठन कूड़े से बिजली बनाने की योजना तैयार कर रहा है। ऐसा होने से कूड़े का निपटारा तो होगा ही साथ में बिजली की समस्या का भी समाधान होगा। गाजियाबाद को भी इसी तरह की उपयोगी योजना बनाने की जरूरत है ताकि समस्या का समाधान हो सके।

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