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यूं ही पैदा नही होती युवाओ में दीवानगी

ना थकना, ना रुकना, अपनो के लिये भिड जाना - ये जादुई कला है चन्द्रशेखर में

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दो दिन से हम लखनऊ में हैं। लॉक डाउन और पुलिस की पेशब्ंदी के बावजूद चन्द्रशेखर से मिलने वाले नौजवानो का लारा लगा हुआ है। एक सोसाइटी की 12 वी मंजिल पर कुछ चुनिन्दा साथियों से मिलने का कार्यक्रम बनाकर शेखर लखनऊ आए थे लेकिन लखनऊ और पूर्वांचल के लोगो को भाई के लखनऊ में होने की भनक क्या लगी लोगों ने हाई राइज सोसाइटी को ही रैली स्थल बना डाला। पुलिस से धक्का मुक्की और भिडं त देख चन्द्रशेखर को नीचे आना पड़ा। एक बडे पार्क में इन दीवाने कार्यकर्ताओ को सम्बोधित किया, फोटो खिचाये और गले लगाया। पुलिस की बन्दिश को देखते हुए चार चार,छ छ के ग्रुप में कार्यकर्ताओ से मिले। मिलने का यह सिलसिला सुबह से देर रात तक चलता रहा, बिना रुके,बिना थके। देर रात लखनऊ शहर की तंग गलियों में पुलिस से भिड्ने वाले अपने कार्यकर्ता अनिकेत धानुक के घर काफिला लेकर पहुंच गए। वहीं नीचे बैठकर सबके साथ भोजन किया और फ़िर प्रमुख साथियों से मन्त्रणा।

देश में 52% संख्या नौजवानो की है, इतिहास साक्षी है कि जब जब नौजवानो ने ठाना है सत्ता को पलट के रख दिया है। असम में छात्रों के आन्दोलन ने खुद की सरकार बना डाली थी तो 1977 में छात्र और नौजवान नेतृत्व देने के लिये घर से बुलाकर लाये और हुकुमत बदल दी। लेकिन लम्बे समय से देश में युवाओ की लीडरशिप मानो जंग खा गई थी। चन्द्रशेखर ने पिछ्ले 4-5 साल से धार देनी शुरु की। नौजवानो के अधिकारों, दलितो,वंचितों और अख्लियत के लोगो के दमन को लेकर मुखर हुए,जेल तक गए। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के दुरुपयोग तक का सामना किया लेकिन झुके नही। जेल से बाहर आने के बाद फ़िर उन्ही लोगों के बीच पहुंचे और उनकी आवाज बुलंद की। फ़िर उनके लिये जेल जाना,फ़िर बाहर आकर व्यवस्था से भिड जाना। बस इस सिलसिले ने ही उन्हे युवाओ का चहेता बना दिया। रावण के पास कोई राजनीतिक विरासत नही है, बस ईमानदारी और जूनून के साथ हक हकूक की आवाज को उठाने का जज्बा है। कार्यकर्ता की धेर्य के साथ बात सुनना,गले लगाना उसके साथ फोटो खिचाना, उसके मोहल्ले में घर पहुंच जाना चन्द्रशेखर का निराला स्वभाव है। जिस कारण नौजवान चन्द्रशेखर के प्रति अभिभूत हैं। देश में शायद ही कोई दूसरा इतना नौजवान नेता हो,जो अपने साथियों से बिना एटीट्यूड,बिना प्रोटोकाल सीधे बिना रुके बिना थके सीधे मिलता हो। उनके एक एक इश्यू पर नजर रखता हो और फ़िर उनके हक हकूक की आवाज बुलंद करता हो। चन्द्रशेखर में इसलिये नौजवानो को भविष्य का नेता दिखता है,जिसमे हुकुमत ही नही व्यवस्था को बदलने की अपार सम्भावनाये हैं।

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