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क्राइम कैपिटल बन गया है प्रदेश का बागपत जिला

वर्ष 2020 में अब तक 40 लोगों की हत्या, कई लोगों के सिर पर मंडरा रहा है मौत का साया

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गाजियाबाद। प्रदेश में जब भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनने पर योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभाली थी तब सभी लोगों को उम्मीद बंधी थी कि प्रदेश का सर्वांगीण विकास होगा और अराजक तत्व कहीं नजर नहीं आएंगे। सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कहा था कि प्रदेश में अपराधी या तो सलाखों के पीछे होंगे या फिर मार दिए जाएंगे।
यह बातें अब खोखली नजर आने लगी हैं। पूरे प्रदेश में अपराध का नंगा नाच हो रहा है। अपराधियों में पुलिस का खौफ कहीं नजर नहीं आ रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में हालत यह है कि राजनीतिक वर्चस्व को लेकर इस जिले में हत्याओं का दौर इस तरह चल रहा है मानो यहां कानून का नहीं बल्कि अपराधियों का राज हो। बागपत जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति अत्यंत खराब है। लगातार हो रही हत्याओं से लोगों में दहशत बन गई है कि पता नहीं अपराधियों की अगली गोली किसको अपना शिकार बना ले। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक होने वाले अपराधों में किसी ना किसी तरह बागपत का लिंक बन रहा है। जेल में बैठे अपराधी न केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बल्कि दिल्ली और हरियाणा के अपराधी गैंग को हथियार बेच रहे हैं। हाल ही में बागपत के पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष संजय खोखर की हत्या के बाद बागपत में राजनीति का घिनौना चेहरा सामने आया है। यहां भाजपा के लोग ही खुलकर एक दूसरे पर हत्या के षडयंत्र रचने का आरोप लगा रहे हैं। संजय खोखर की हत्या में एक बार फिर तिहाड़ जेल में बंद सुनील राठी का नाम उभर कर सामने आ रहा है। छपरोली के विधायक योगेश धामा के नजदीकी लोग क्षेत्र के सांसद चौधरी सत्यपाल पर अपराधियों के संरक्षण का आरोप लगा रहे हैं। हालांकि योगेश धामा ने आज सभी बातों का खंडन करते हुए सांसद का बचाव करने का प्रयास किया है। यहां यह बात बता दें कि भाजपा के जिस पूर्व जिला अध्यक्ष का 2 दिन पूर्व मर्डर हुआ है वह खुले तौर पर संसद के विरोधियों में गिने जाते थे।
बागपत में कानून व्यवस्था की स्थिति कितनी खराब है इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि वर्ष 2020 के साडे 7 महीनों में अब तक 38 लोगों की हत्या हो चुकी है। इनमें से अधिकांश केस अनसुलझे हैं या फिर इस ढंग से खोले गए हैं कि लोगों ने खुले तौर पर पुलिस पर आरोप जड़े हैं कि वह मनमाने ढंग से केस खोलकर अपने सिर से पल्ला झाड़ लेती है। संजय खोखर की हत्या में भी कहा जा रहा है कि एसपी के इशारे पर पुलिस ने मनमाने ढंग से एफ आई आर में नामजदगी की हैं। कुछ अनसुलझे केसों में बासोली गांव में कुछ युवकों के बीच मामूली बात पर झगड़ा हो गया जिसे युवकों के दोनों गुटों ने अपनी इज्जत की बात बना लिया। पुलिस तक बात पहुंचने के बाद पुलिस ने इस मामले में लापरवाही बरती। परिणाम यह निकला कि 1 दिन युवकों के दोनों गुटों में जमकर खून खराबा हुआ जिसमें तीन युवकों की जान चली गई। पुलिस अभी तक जांच में उलझी हुई है और कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। दूसरा मामला 22 जून को खेड़ी गांव का है जहां ₹50000 के इनामी बदमाश परमवीर तुगाना व उसके साथियों पर दिनदहाड़े फायरिंग की गई जिसमें इलाज के दौरान परमवीर ने दम तोड़ दिया। इस वारदात के पीछेसुनील राठी का नाम खुले तौर पर लिया जा रहा है। बदरखा गांव में राष्ट्रीय लोक दल के नेता देशपाल बदरखा की दिनदहाड़े गांव के बीच गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। पिछले 2 साल के दौरान देशपाल बदरखा पर कई बार हमले हुए थे उन्होंने पुलिस से सुरक्षा भी मांगी लेकिन उन्हें सुरक्षा प्रदान नहीं की गई। गांधी गांव में युवकों के दो गुटों में झगड़ा हुआ जिसकी सूचना मिलने पर भी पुलिस लापरवाह बनी रही। एक फेसबुक पोस्ट पर हुए इस झगड़े का परिणाम रक्षाबंधन वाले दिन भयानक निकला। खूनी संघर्ष में रवित नाम के युवक की हत्या कर दी गई। दो अन्य युवक अभी तक जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। बड़ौत में कोतवाली के नजदीक दिनदहाड़े एक किशोरी की गोलियों से भून कर हत्या की गई जिसका आज तक कोई खुलासा नहीं हो सका है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद अल्लाह शुरू होते ही एडीजी राजीव सभरवाल ने बागपत में पुलिस अधिकारियों की मीटिंग लेते हुए कहा था कि अनलॉक के दौरान अपराधी खुले तौर पर अपनी गतिविधियां शुरू कर सकते हैं और अपराध बढ़ने की संभावना है। बड़े अधिकारी की इस चेतावनी के बावजूद बागपत पुलिस हाथ पर हाथ रखे बैठी रही और परिणाम यह है कि बागपत आज क्राइम कैपिटल की तरह बनता जा रहा है।
आम आदमी का मानना है कि जिले में अधिकांश हत्या अपना राजनीतिक वर्चस्व पैदा करने के लिए की गई हैं। जेल में बंद कई अपराधी जिला पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अपने विरोधियों को खत्म कर रहे हैं ताकि क्षेत्र में उनका दबदबा कायम रह सके। भाजपा का पूर्व जिला अध्यक्ष जिनकी हत्या की गई है उन्होंने भी वर्ष 2017 में छपरोली से विधानसभा के लिए टिकट मांगा था। संसद के विरोध के चलते उन्हें टिकट नहीं मिल सका। संजय खोखर की नजर भी जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर थी और वह जिला पंचायत का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। फिलहाल बागपत में भय और दहशत का माहौल है। पुलिस यदि इसी तरह काम करती रही तो बागपत में कुछ अन्य हत्या भी हो सकती हैं।

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