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ब्राह्मण वोटों के लिए सपा और बसपा में तेज हुई जंग

भगवान परशुराम की मूर्ति को लेकर सपा बसपा आमने सामने

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गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण वोट एक बार फिर राजनीति का केंद्र बनते जा रहे हैं। विशेष तौर पर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ब्राह्मण वोटों को रिझाने में लगी है।

वैसे तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव मैं अभी काफी देर है लेकिन ब्राह्मण वोटों को अपने पाले में खींचने की जंग विशेष तौर पर सपा और बसपा के बीच शुरू हो गई है। अपराधी विकास दुबे के प्रकरण के बाद यह जंग और तेज हुई है। प्रदेश में यह बात इस समय बड़ी तेजी के साथ हो रही है कि वर्तमान सरकार ब्राह्मणों का उत्पीड़न कर रही है। इस मुद्दे को कांग्रेश के अलावा सपा और बसपा भी भुनाने में लगी हैं। पिछले दिनों सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने घोषणा की थी कि समाजवादी पार्टी लखनऊ में भगवान परशुराम की 108 फीट ऊंची प्रतिमा लग जाएगी साथ ही मंगल पांडे की प्रतिमा भी लगवाई जाएंगी। सपा सरकार में मंत्री रहे मनोज पांडे और अभिषेक मिश्र विशेष तौर पर ब्राह्मणों के बीच मुहिम चला रहे हैं।

समाजवादी पार्टी की मुहिम को एनकाउंटर करने के लिए बसपा प्रमुख मायावती ने रविवार को घोषणा की कि बसपा सरकार में आने पर भगवान परशुराम की भव्य मूर्ति लगाने के साथ-साथ उनके नाम पर अस्पताल भी बनवाएगी। गौरतलब है कि वर्ष 2009 में बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर ब्राह्मणों की वोट ली थी। उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाता वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 11% हैं।

सपा और बसपा के अलावा कांग्रेश के ब्राह्मण चेहरे जितिन प्रसाद ब्रह्म चेतना संवाद नमक कार्यक्रम चलाकर ब्राह्मणों में अपना संपर्क तेज कर रहे हैं। आचार्य प्रमोद कृष्णम और पूर्व सांसद राजेश मिश्र भी इस मुद्दे पर सक्रिय हैं। कांग्रेस ने अपनी जिला और शहर कमेटियों के गठन में भी ब्राह्मणों को अच्छी महत्व दीया है। देश के लखनऊ कानपुर मथुरा वाराणसी प्रतापगढ़ बस्ती संत कबीर नगर महाराजगंज गोरखपुर कुशीनगर देवरिया और सोनभद्र जिलों में ब्राह्मण मतदाता चुनाव की हार और जीत तय करते हैं। पूर्वांचल में लगभग 32 जिले ऐसे हैं जहां ब्राह्मण मतदाता बहुत मजबूत स्थिति में हैं।

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