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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 13 जिलों में बसपा के सामने कड़ी चुनौती होंगे चंद्रशेखर

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 13 जिलों में बसपा के सामने कड़ी चुनौती होंगे चंद्रशेखर

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गाजियाबाद। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 13 जिलों में दलित आबादी का काफी बड़ा हिस्सा है। इन 13 जिलों में बहुजन समाज पार्टी का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है लेकिन अब तेजी से उभर रहे युवा नेता चंद्रशेखर इन में बहुजन समाज पार्टी के सामने कड़ी चुनौती पैदा कर रहे हैं।
भीम आर्मी से दलित समाज में गहरी घुसपैठ बनाने वाले रावण के नाम से प्रसिद्ध रहे चंद्रशेखर ने बहुजन समाज पार्टी को कड़ी चुनौती देनी शुरू कर दी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलित युवाओं के बीच चंद्रशेखर एक आइकन बनकर उभर रहे हैं। इतिहास गवाह है कि बसपा प्रमुख मायावती जब पहली बार प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थी उसके बाद से ही दलित समाज की प्रमुख जाति जाटव में उनकी गहरी घुसपैठ बन गई थी। यह पहला मौका है कि जाटव जाति के बीच किसी ने मायावती और बहुजन समाज पार्टी के अस्तित्व को चुनौती दी है। यह चुनौती विशेष तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 13 जिलों मे है। इन 13 जिलों की जातीय संरचना ऐसी है कि इनमें दलित मुस्लिम और जाट जाति का बाहुल्य है। दलित और मुस्लिम जब भी एकजुट हुए हैं तभी बसपा को भारी कामयाबी हासिल हुई है। दूसरी तरफ जाट और मुस्लिम मिलकर भी कामयाबी का इतिहास लिखते रहे हैं। पिछले दो दशक से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से पर बसपा की जबरदस्त पकड़ रही है। बसपा की पकड़ का प्रमुख कारण इन जिलों में जाटव समाज की बड़ी आबादी का होना है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार सहारनपुर में 21. 73 प्रतिशत, मुजफ्फरनगर में साढे 13%, मेरठ में लगभग 19%, बागपत में 11%, गाजियाबाद में साढे 18%, गौतम बुध नगर में 17%, बिजनौर में 21%, बुलंदशहर में 20%, अलीगढ़ में 22%, आगरा में 28%, मुरादाबाद में 16%, बरेली में 13% जबकि रामपुर में लगभग 14% दलित आबादी निवास करती है। इन जिलों में एक से अधिक बार बसपा ने अपना परचम लहराया है।
अब बसपा के सामने चंद्रशेखर एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं। चंद्रशेखर की तीखी नजर दलित समाज के युवा और मुस्लिम समाज पर टिकी है। उन्होंने आजाद समाज पार्टी का गठन करने से पूर्व और बाद में भी मुस्लिम समाज और दलित समाज की समस्याओं को प्रमुखता के साथ उठाया है। विशेष तौर पर चंद्रशेखर का नारा है संविधान बचाओ। संविधान बचाओ के नारे का अर्थ है किस संविधान ही हमारे मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है। उनका कहना है कि वर्तमान भाजपा सरकार संविधान में ऐसे बदलाव करने पर उतारू है जिससे इन दोनों बड़े समाज के मौलिक अधिकार खत्म हो जाएंगे।यह बात दलित और मुस्लिम समाज की ऐसी कमजोर नस है जिसके बल पर चंद्रशेखर लगातार अपने कदम आगे बढ़ा रहे हैं। पिछले 1 वर्ष के दौरान उत्तर प्रदेश में बसपा को कई बड़े झटके लगे हैं। बसपा के एक दर्जन से अधिक ऐसे नेता पार्टी छोड़ गए हैं जिन्होंने बसपा की नींव को मजबूत करने का काम किया था। ऐसे हालात में चंद्रशेखर को बसपा की नीव समझे जाने वाले दलित समाज में अपनी घुसपैठ करने में आसानी हो रही है। फिलहाल शह और मात का खेल जारी है यह बात चुनाव में ही पता चलेगी कि ऊंट किस करवट बैठता है।

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