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सुधरने को तैयार नहीं है गाजियाबाद पुलिस

सुधरने को तैयार नहीं है गाजियाबाद पुलिस

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गाजियाबाद। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी जब लखनऊ से गाज़ियाबाद आए थे तब माना जा रहा था कि उनके नेतृत्व में गाजियाबाद पुलिस की कार्यशैली में गुणात्मक ढंग से सुधार आएगा। पिछले 1 माह से जो हालात गाजियाबाद में नजर आ रहे हैं उन्हें देखकर यही कहा जा सकता है कि पुलिस की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं आया है।
पत्रकार विक्रम जोशी की हत्या और बिल्डर विक्रम त्यागी की रहस्यमय गुमशुदगी गाजियाबाद पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं। गाजियाबाद पुलिस किस हद तक मामलों को मोड़ने में माहिर है उसका अनूठा उदाहरण कोतवाली घंटाघर क्षेत्र के दिल्ली गेट इलाके की अफगानान मैं हुई चोरी का मामला है। गत 20 जुलाई की रात अफगानान के दो घरों में चोरी हुई थी। चोर जिस समय चोरी के बाद भाग रहे थे तब पीड़ित परिवार में जाग हो गई। भाग रहे चोरों में से एक कैला भट्टा निवासी सना गुल पुत्र मुश्ताक हुसैन को मोहल्ले के लोगों ने दबोच लिया जबकि उसका साथी फरार हो गया। इस मामले में मोहल्ले के प्रमुख नागरिक आप अभी तक के संपादक इमरान खान ने खुद फोन कर पुलिस को चोर के पकड़े जाने की जानकारी दी। घटनास्थल पर कैला भट्टा चौकी प्रभारी पहुंचे जिन्हें चोर सौंप दिया गया।
पुलिस ने किस तरह इस सारे मामले को मोड़ा इसका पता इस बात से चलता है कि कैला भट्टा चौकी को सौंपी गए चोर को अगले रोज नवयुग मार्केट पुलिस चौकी द्वारा नशीली गोलियां रखने के आरोप में गिरफ्तार दिखा दिया गया। शहर के एक प्रमुख पत्रकार द्वारा चोर पकड़े जाने की जानकारी देना और चोर को पुलिस को सौंपने के बावजूद सारे मामले को पुलिस ने पूरी तरह मोड़ दिया। यह बड़ा सवाल यह उठता है कि चोर यदि पकड़ा ही नहीं गया है तो जिन घरों में चोरी हुई है उनका सामान पुलिस कहां से बरामद करेगी। इसके साथ ही पुलिस के अनुसार चोर पकड़ा ही नहीं गया है तो उसके फरार साथी का पता कैसे लगाया जाएगा।
इस मामले में चूंकि आप अभी तक के संपादक इमरान खान सीधे जुड़े थे इसलिए आप अभी तक में पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की गई। फिर भी पुलिस ने सना गुल को नशीली गोलियों के साथ ही गिरफ्तार किया गया अपने प्रेस नोट में बताया है। यह गाजियाबाद पुलिस का एक उदाहरण है कि पुलिस किस तरह मामलों को मोड़ती है। एक प्रमुख पत्रकार के द्वारा पुलिस को फोन करना और फिर भी पुलिस को मामले को मोड़ देना साबित कर रहा है कि पुलिस अपनी मनमर्जी पर उतारू है। पुलिस द्वारा मनमर्जी का उदाहरण विक्रम जोशी हत्याकांड भी है जिसको पुलिस द्वारा जुआ और सट्टे के विवाद में हुई हत्या साबित करने का प्रयास किया जा रहा है कि इस मामले में यदि पत्रकारों की एकजुटता सामने नहीं होती तो निश्चित तौर पर विजय नगर पुलिस इसे जुए का विवाद बताकर खारिज कर देती। मामला अब स्थानीय पुलिस के काबू से बाहर है शायद इसलिए आज एक हल्की सी कार्रवाई की गई है।

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