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राजस्थान में भी डंका बजेगा रावण का, बसपा की गलतियो को समझकर बनाई जा रही है रणनीति

राजस्थान में भी डंका बजेगा रावण का, बसपा की गलतियो को समझकर बनाई जा रही है रणनीति

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युवाओ के क्रेजी सैलाब, बसपा की गलतियों से सीख, बाबा साहब डा भीम राव अम्बेडकर और मान्यवर कांशीराम साहब के मिशन और मूवमेंट को आगे बढाने की सधे कदमों से बनाई गईं रणनीति भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के मुखिया चन्द्रशेखर आजाद रावण का राजस्थान में भी डंका बजवा कर रहेगी। दो दिवसीय दौरे में मैने खुद, मेरे साथी अशोक सिद्धार्थ व भाई इमरान खान के साथ यही निष्कर्ष निकाला है। दूसरों की गलतियों से सीख लेकर उन गलतियों से बचना चन्द्रशेखर की खासियत है। साथियों की काब्लियत को पहचान कर उनसे समीकरण बनाकर काम लेना भी उनकी खूबी है तो खुद को समाज के लिये झोक कर युवाओ में जोश भर देना अतिरिक्त गुण है। राजस्थान में बसपा कई बार बिखरी है। लेकिन इस बार उसके बिखराव ने राजस्थान को निराशा के बजाय भीम आर्मी के रुप में विकल्प प्रदान किया है। पिछ्ले तीन चार साल में शेखर ने खुद राजस्थान में जमीन पर उतरकर संगठन का जो ढांचा खड़ा किया है वह काबिले तारीफ़ है। पढे लिखे और मिशन मूवमेंट की समझ रखने वाले युवाओ की फौज पूरे राजस्थान में है।
रावण ने राजस्थान में सबसे बड़ी जाति जाट और उसके बाद मीणा, दलित,आदिवासी व मुसलमान के समीकरण को दबाकर साधा है। जाट,मुस्लिम और दलित आदिवासी के समीकरण पर उनका होम वर्क गजब का है। जिस तिकडी को शेखर ने राजस्थान मे उतारा है वह उनकी बेहद विश्स्वनीय टीम में शुमार है। राजस्थान ही वह प्रदेश है जहाँ जाट,दलित और मुस्लिम साथ आने को अर्से से बेकरार है। चन्द्रशेखर ने इस बेकरारी को बारीकी से समझा है। प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर सक्रिय अनिल धेनवाल उनके मेहनती और विश्वसनीय साथी हैं तो बाल्मीकि समाज के जितेन्द्र अट्वाल संघर्ष मे तपे साथी हैं। प्रदेश में पिछ्ले विधान सभा चुनाव के नतीजे बताते हैं कि 200 सदस्यीय विधान सभा सीटों पर यहां गैर भाजपा गैर कांग्रेस के करीब 28 सद्स्य जीते हैं और करीब सौ सीटों पर वे दुसरे नंबर पर रहे हैं। बिखरे हुए इस तीसरे फ्रंट के विधान सभा सदस्यों के आँकड़े बताते हैं कि राजस्थान में तीसरे विकल्प की जबरदस्त संभावनाए हैं। इन संभावनाओ को बेहद सधी हुई रणनीति के साथ भुनाने पर चन्द्रशेखर की पैनी नजर है। भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी की नौजवानो की टीम उत्साह से लबरेज है। लॉक डाउन के बावजूद बीते इतवार को उन्होने जयपुर में एक सफल सम्मेलन का आयोजन कर अपनी राजनीतिक पारी का आगाज कर दिया है।मिशन मूवमेंट को पारदर्शिता और जूनून के साथ आगे बढाने की ललक इस सम्मेलन में साफ़ दिखाई दी तो नेत्रत्व के प्रति उनके समर्पण ने कायल कर दिया।प्रदेश के 33 जिलों को 7 समभागो में बांट कर सम्भाग स्तरीय मिटिंग की तैयारी की जा रही है। जयपुर में राज्य स्तरीय कार्यालय बनाकर पूरी तैयारी से टीम राजस्थान यहां रावण का डंका बजाने को कमर कसती नजर आती है।

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